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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 268 of 421

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Page 268

पूर्वार्ध बीसवां अध्याय
अश्विना तेजसा चक्षुः प्राणेन सरस्वती वीर्यम्.
वाचेन्द्रो बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम्.. (८०)
यजमान हेतु अश्विनी देव ने तेज से नेत्र ज्योति प्रदान की. यजमान हेतु सरस्वती
देवी ने प्राण के साथ पराक्रम प्रदान किया. यजमान हेतु इंद्र देव ने वाणी के साथ
इंद्रिय सामर्थ्य धारण की. (८०)
गोमद् षु णासत्याश्वावद्यातमश्विना. वर्ती रुद्रा नृपाय्यम्.. (८१)
अश्विनीकुमारो! गोमय, अश्वमय और श्रेष्ठ राह वाले इस सोमयाग में
पधारने की कृपा कीजिए. आप सत्य में निरत हैं. आप अन्यायियों को पीड़ित
कीजिए. (८१)
न यत्परो नान्तर ऽ आदधर्षदृवृषण्वसू. दुःश १७ सो मर्त्यो रिपुः.. (८२)
हे अश्विनीकुमारो! आप ओषधरस की वर्षा करते हैं. जो दुष्ट हो, जो हमारा
शत्रु हो, वह हमें पीड़ित न करे. (८२)
ता न ऽ आ वोढमश्विना रयिं पिशङ्गरसन्दृशम्. धिष्ण्या वरिवोविदम्.. (८३)
हे अश्विनीकुमारो! आप सब को धारने वाले हो. आप दोनों हमारे लिए पीली
सोने जैसी बढ़ने वाली संपदा प्रदान कीजिए. (८३)
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती. यज्ञं वष्टु धियावसुः.. (८४)
सरस्वती देवी पवित्र हैं. अन्न द्वारा शक्तिशाली कार्य करने वाली हैं. यज्ञ को
धारें. धन और बुद्धि बरसाएं. (८४)
चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्. यज्ञं दधे सरस्वती.. (८५)]
सरस्वती देवी सत्य वचन और सत्य मार्ग की प्रेरणादायिनी हैं. सुमतियों को
चेताने वाली हैं. सरस्वती देवी यज्ञ को धारण करें. (८५)
महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना. धियो विश्वा वि राजति.. (८६)
सरस्वती देवी सब की बुद्धियों को विशेष रूप से प्रकाशित करती हैं. सरस्वती
देवी महान् और ज्ञान का समुद्र हैं. वे ज्ञान की पताका फहराती हैं. (८६)
इन्द्रा याहि चित्रभानो सुता ऽ इमे त्वायवः. अण्वीभिस्तना पूतासः.. (८७)
हे इंद्र देव! आप अद्भुत हैं. आप अपने पुत्रों के यज्ञ में पधारने की कृपा
कीजिए. हम ने अंगुलियों से निचोड़ कर आप के लिए सोमरस को पवित्र बनाया
है. (८७)
इन्द्रा याहि धियेषितो विप्रजूतः सुतावतः. उप ब्रह्माणि वाघतः.. (८८)
२६८ - यजुर्वेद