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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 224 of 421

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Page 224

अठारहवां अध्याय

वाजश्च मे प्रसवश्च मे प्रयतिश्च मे प्रसितिश्च मे धीतिश्च मे क्रतुश्च मे स्वरश्च मे
श्लोकश्च मे श्रवश्च मे श्रुतिश्च मे ज्योतिश्च मे स्वश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (१)
यह यज्ञ हमारे लिए अन्नदाता हो. यह यज्ञ हमारे लिए ऐश्वर्यदाता हो. यह यज्ञ
हमारे लिए पौरुष हो. यह यज्ञ हमारे लिए प्रबंधकौशल हो. यह यज्ञ हमारे लिए बुद्धि
हो. यह यज्ञ हमारे लिए निर्णय क्षमता हो. यह यज्ञ हमारे लिए करने की शक्ति हो.
यह यज्ञ हमारे लिए श्लोक हो. यह यज्ञ हमारे लिए श्रवणक्षमता हो. यह यज्ञ हमारे
लिए तेजदाता हो. सर्वविधि फलीभूत हो. (१)
प्राणश्च मेपानश्च मे व्यानश्च मेसुश्च मे चित्तं च म ऽ आधीतं च मे वाक् च मे
मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे दक्षश्च मे बलं च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (२)
यह यज्ञ हमें प्राण दे. यह यज्ञ हमें अपान दे. यह यज्ञ हमें व्यान दे. यह यज्ञ हमें
मुख्य प्राण दे. यह यज्ञ हमें चिंतन दे. यह यज्ञ हमें वाणी दे. यह यज्ञ हमें नेत्र दे. यह
यज्ञ हमें कान दे. यह यज्ञ हमें दक्षता दे. यह यज्ञ हमें बल दे. यह यज्ञ सर्वविधि
फलीभूत हो. (२)
ओजश्च मे सहश्च म ऽ आत्मा च मे तनूश्च मे शर्म च मे वर्म च मेङ्गानि च मेस्थीनि
च मे परूंषि च मे शरीराणि च म ऽ आयुश्च मे जरा च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (३)
इस यज्ञ से हमारा ओज फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारी सहिष्णुता फलीभूत
हो. इस यज्ञ से हमारा आत्मबल फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारा दैहिकबल फलीभूत
हो. इस यज्ञ से हमारा सुख फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारा कवच फलीभूत हो. इस
यज्ञ से हमारी अस्थियों की दृढ़ता फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारी संधियों की दृढ़ता
फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारी निरोगता फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारी आयु
फलीभूत हो. इस यज्ञ से हमारी परिपक्वता फलीभूत हो. (३)
ज्यैष्ठ्यं च म ऽ आधिपत्यं च मे मन्युश्च मे भामश्च मेमश्च मेम्भश्च मे जेमा च मे
महिमा च मे वरिमा च मे प्रथिमा च मे वर्षिमा च मे द्राघिमा च मे वृद्धं च मे वृद्धिश्च
मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (४)
२२४ - यजुर्वेद 632/14