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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 20 of 421

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Page 20

इंद्र द्वारा नमुचि से रक्षा ७१ २६६
वरुण देव का आह्वान ७२ २६६
अश्विनीकुमारों द्वारा यजमान के पराक्रम की वृद्धि ७३ २६६
देवों से यज्ञ में पधारने का अनुरोध ७४ २६६-२६७
अश्विनीकुमारों की स्तुति ७५-७७ २६७
अग्नि द्वारा सोम को ग्रहण करना ७८-७९ २६७
अश्विनीकुमारों से प्रार्थना ८०-८३ २६८
सरस्वती देवी की उपासना ८४-८६ २६८
यज्ञ में इंद्र देव का आह्वान ८७-९० २६८-२६९
उत्तरार्ध
इक्कीसवां अध्याय
वरुण देव की उपासना १-२ २७०
अग्नि देव की स्तुति ३-४ २७०
अदिति देवी की स्तुति तथा आह्वान ५-६ २७०-२७१
मित्र और वरुण देव की आराधना ७-११ २७१-२७२
रक्षा के लिए अग्नि से प्रार्थना १२-१५ २७२
बल एवं आयु वृद्धि की याचना १६-२८ २७२-२७४
सर्व कल्याण के लिए यज्ञ की कामना २९-५६ २७४-२८२
देवगणों द्वारा पराक्रम धारण ५७-५८ २८२
देवगणों को सोम की भेंट ५९-६० २८२
देवगणों का आह्वान ६१ २८३
बाईसवां अध्याय
तेजोमय देव की उपासना १ २८४
यज्ञ से ज्ञान की वृद्धि २ २८४
अग्नि से देवताओं तक पहुंचने की प्रार्थना ३-४ २८४
प्रजापति की संतुष्टि के लिए अभिषेक ५ २८४-२८५
विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण ६-८ २८५-२८६
सविता देव की स्तुति ९-१४ २८६
अग्नि की महिमा एवं वंदना १५-१९ २८६-२८७
विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण २० २८७-२८८
संसार के नायक २१ २८८