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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 199 of 421

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Page 199

पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय
जागने वाले को नमन. बैठने वाले को नमन. ठहरने वाले को नमन. दौड़ने वाले को
नमन. चित्त में विराजमान रुद्र देव को नमन. ( २३ )
नमः सभाभ्यः सभापतिभ्यश्च वो नमो नमो ऽ श्वेभ्यो ऽ श्वपतिभ्यश्च वो नमो नम ऽ-
आव्याधिनीभ्यो विविध्यन्तीभ्यश्च वो नमो नम ऽ उगणाभ्यस्तृ ँ हतीभ्यश्च वो
नमः.. ( २४)
सभा स्वरूप रुद्र देव को नमन. सभापति रुद्र देव को नमन. अश्वपति रुद्र देव
को नमन. निरोगपति रुद्र देव को नमन. युद्ध में सहायक रुद्र देव को नमन. शत्रु
प्रहरी रुद्र देव को नमन. ( २४ )
नमो गणेभ्यो गणपतिभ्यश्च वो नमो नमो ब्रातेभ्यो ब्रातपतिभ्यश्च वो नमो नमो
गृत्सेभ्यो गृत्सपतिभ्यश्च वो नमो नमो विरूपेभ्यो विश्वरूपेभ्यश्च वो नमः.. ( २५)
गणों को नमन. गणपति को नमन. व्रतपति को नमन. व्रत के अधिपति को
नमन. बुद्धिमान को नमन. बुद्धिमानों को नमन, विविध रूपवान को नमन. बहुत
रूपवान को नमन. ( २५ )
नमः सेनाभ्यः सेनानिभ्यश्च वो नमो नमो रथिभ्यो अरथेभ्यश्च वो नमो नमः क्षत्तृभ्यः
संगृहीतृभ्यश्च वो नमो नमो महद्द्भ्यो अर्भकेभ्यश्च वो नमः.. ( २६)
सेना स्वरूप को नमन. सेनापति को नमन. रथवान को नमन. रथहीन को
नमन. क्षत्रिय को नमन. संग्रहकर्ता को नमन. महान् स्वरूप को नमन. कनिष्ठ
को नमन. ( २६ )
नमस्तक्षभ्यो रथकारेभ्यश्च वो नमो नमः कुलालेभ्यः कमारिभ्यश्च वो नमो नमो
निषादेभ्यः पुञ्जिष्ठेभ्यश्च वो नमो नमः श्वनिभ्यो मृगयुभ्यश्च वो नमः.. ( २७)
तरकसकार और रथकार को नमन. कुम्हार और लोहार को नमन. भील और
जंगलवासी को नमन. कुत्ता पालक और शिकारियों को नमन. ( २७ )
नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः शर्वाय च पशुपतये
च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च.. ( २८)
कुत्तों को नमन. कुत्तों के स्वामी के लिए नमन. संसार के स्वामी को नमन.
रुद्र देव के लिए नमन. विश्व स्वामी को नमन. पशुपति के लिए नमन. पशुपति को
नमन. नीली गरदन वाले व नीले कंठ वाले के लिए नमन. ( २८ )
नमः कपर्दिने च व्युप्तकेशाय च नमः सहस्राक्षाय च शतधन्वने च नमो गिरिशयाय
च शिपिविष्टाय च नमो मीढुष्टमाय चेषुमते च.. (२९)
जटामय रुद्र को नमन. मुंडित के लिए नमन. हजारों आंखों वाले के लिए
यजुर्वेद - १९९