यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपूर्वार्ध बारहवां अध्याय
हे अग्नि! आप की जो ज्वाला चमकीली और चंद्रमा जैसी है, आप की जो
ज्वाला पवित्र है और यज्ञ से संबंधित है, हम उन्हें आहुति अर्पित करते हैं. (१०४)
इषमूर्जमहमित आदमृतस्य योनिं महिषस्य धाराम्.
आ मा गोषु विशत्वा तनूषु जहामि सेदिमनिराममीवाम्.. (१०५)
अग्नि ऊर्जस्वी, अमरता के मूल व महान् इच्छाएं पूरी करने वाले हैं. हम अग्नि
को आमंत्रित करते हैं. वे गायों में और हमारे शरीर में प्रवेश करने की कृपा करें.
उन की कृपा से हम निरोगी हो जाएं. (१०५)
अग्ने तव श्रवो वयो महि भ्राजन्ते अर्चयो विभावसो.
बृहद्दानो शवसा वाजमुक्थ्यं दधासि दाशुषे कवे.. (१०६)
हे अग्नि! आप प्रसिद्ध धनवान व त्रिकालज्ञ हैं. आप का धुआं यज्ञ होने की
सूचना देता हुआ स्वर्गलोक तक जाता है. आप यमजान को अन्नधन प्रदान करते
हैं. (१०६)
पावकवर्चाः शुक्रवर्चा ऽ अनूनवर्चा ऽ उदियर्षि भानुना.
पुत्रो मातरा विचरन्नुपावसि पृणक्षि रोदसी उभे.. (१०७)
हे अग्नि! आप पवित्र और अत्यधिक वर्चस्व वाले हैं. आप सूर्य रूप में उदय
होते हैं. जैसे मातापिता बेटे का पालनपोषण करते हैं, वैसे ही आप स्वर्गलोक और
पृथ्वीलोक दोनों लोकों का पालन करते हैं. (१०७)
ऊर्जो नपाज्जातवेदः सुशस्तिभिर्मन्दस्व धीतिभिर्हितः.
त्वे इषः सन्दधुर्भूरिवर्पसश्चित्रोतयो वामजाताः.. (१०८)
हे अग्नि! आप ऊर्जस्वी, सर्वज्ञ हैं. हम अच्छी प्रशंसा से आप को आनंदित
करते हैं. आप सब का हित धारिए. यजमान रक्षा साधनों से सुरक्षित और श्रेष्ठ कुल
में जन्म लेने वाले हैं. वे आप को अन्नमयी आहुति भेंट करते हैं. (१०८)
इरज्यन्नग्ने प्रथयस्व जन्तुभिरस्मे रायो अमर्त्य.
स दर्शतस्य वपुषो वि राजसि पृणक्षि सानसिं क्रतुम्.. (१०९)
हे अग्नि! आप अविनाशी हैं. यजमान सर्वप्रथम आप को प्रज्वलित करते हैं.
आप यजमानों को धन प्रदान कीजिए. आप अपने सुंदर शरीर से शोभित होते हैं.
आप यज्ञ में सारी आकांक्षाएं पूर्ण करते हैं. (१०९)
इष्कर्त्तारमध्वरस्य प्रचेतसं क्षयन्त ँ१s राधसो महः.
रातिं वामस्य सुभगां महीमिषं दधासि सानसि ँ१s रयिम्.. (११०)
हे अग्नि! आप यज्ञ के कर्ताधर्ता, श्रेष्ठ चिंतन वाले हैं. आप यजमान को महान्
यजुर्वेद - १५७