Skip to content
SarvaKosh
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 14 of 421

Read in context
Page 14

प्रेरणादायक देव ३० १२३
हवि की परिपक्वता के लिए प्रार्थना ३१ १२३
प्रजा के कल्याण के लिए सोम ग्रहण ३२ १२३
इंद्र रक्षक अश्विनीकुमार ३३-३४ १२३-१२४
ग्यारहवां अध्याय
सविता देव की प्रशंसा १-११ १२५-१२७
अग्नि की स्तुति १२ १२७
पुरोहित और यजमान के लाभ की कामना १३ १२७
रक्षा के लिए इंद्र का आह्वान १४ १२७
वाजिन तथा अग्नि की स्तुति एवं महिमा १५-३८ १२७-१३१
पृथ्वी की स्तुति ३९ १३१
अग्नि की महिमा और स्तुति ४०-४९ १३१-१३३
जल देव की स्तुति ५०-५२ १३३
कल्याणकारी अग्नि ५३ १३३-१३४
रुद्रगणों द्वारा पृथ्वी की रचना ५४-५५ १३४
देवमाता सिनीवाली देवी ५६-५७ १३४
उखा देव की स्तुति ५८-६१ १३४-१३६
ऐश्वर्य की कामना ६२ १३६
उखा की स्तुति ६३-६५ १३६
अग्नि के लिए आहुति समर्पण ६६ १३६-१३७
परमेश्वर के लिए आहुति समर्पण ६७ १३७
उखा देव की स्तुति ६८-६९ १३७
पराक्रम में बढ़ोतरी के लिए अग्नि की स्तुति ७०-८३ १३७-१३९
बारहवां अध्याय
सूर्य की महिमा का वर्णन १-३ १४०
सविता देव का विस्तार ४ १४०-१४१
अग्नि की महिमा ५-११ १४१-१४२
बंधन दूर करने के लिए वरुण से प्रार्थना १२ १४२
अग्नि का जन्म एवं विस्तार १३-४४ १४२-१४७
यमदूतों से आग्रह ४५ १४७
उषा देवी से प्रार्थना ४६ १४७