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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

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Page 117

पूर्वार्ध दसवां अध्याय
को गर्भ में रखते हैं. अपने शासन में रखने में सक्षम हैं. हमें राष्ट्र प्रदान करें. इन के
लिए स्वाहा. ( ३ )
सूर्यत्वचस स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा सूर्यत्वचस स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त
सूर्यवर्चस स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा सूर्यवर्चस स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त मान्दा
स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा मान्दा स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त व्रजक्षित स्थ राष्ट्रदा
राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा व्रजक्षित स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त वाशा स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे
दत्त स्वाहा वाशा स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त शविष्ठा स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा
शविष्ठा स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त शक्वरी स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा शक्वरी
स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त जनभृत स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा जनभृत स्थ राष्ट्रदा
राष्ट्रममुष्मै दत्त विश्वभृत स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहा विश्वभृत स्थ राष्ट्रदा
राष्ट्रममुष्मै दत्तापः स्वराज स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्त.
मधुमतीर्मधुमतीभिः पृच्यन्तां महि क्षत्रं क्षत्रियाय वन्वाना ऽ अनाधृष्टाः सीदत सहौजसो
महि क्षत्रं क्षत्रियाय दधतीः.. (४)
हे जल! आप सूर्य की त्वचा में स्थित हैं. आप राष्ट्रदायी हैं. आप हमें राष्ट्र
प्रदान करें आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप आनंददायी हैं. आप हमें आनंद प्रदान
करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप राष्ट्रदायी हैं. आप राष्ट्र
प्रदान करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप पशुपालक हैं. आप
पशु प्रदान करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप बलदायी हैं.
आप बल प्रदान करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप राष्ट्रदायी
हैं. आप राष्ट्र प्रदान करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल! आप
क्षमतादायी हैं. आप क्षमता प्रदान करने की कृपा करें. आप के लिए स्वाहा. हे जल!
आप राष्ट्रदायी हैं. आप राष्ट्र प्रदान करने की कृपा करें. आप जनता का
भरणपोषण करने वाले हैं. आप राष्ट्र प्रदान करें. आप के लिए स्वाहा. आप विश्व
का भरणपोषण करने वाले हैं. आप राष्ट्र प्रदान करें. आप के लिए स्वाहा. आप हमें
मधुरमधुर जलधाराओं में सींचने की कृपा करें. आप हमें क्षत्रियोचित बल प्रदान
करने की कृपा करें. आप हमें साहस व बल प्रदान करने की कृपा करें. क्षत्रियोचित
सामर्थ्य धारण करने की कृपा करें. यहां प्रतिष्ठित करने की कृपा करें. ( ४ )
सोमस्य त्विषिरसि तवेव मे त्विषिर्भूयात्.
अग्नये स्वाहा सोमाय स्वाहा सवित्रे स्वाहा सरस्वत्यै स्वाहा पूष्णे स्वाहा बृहस्पतये
स्वाहेन्द्राय स्वाहा घोषाय स्वाहा श्लोकाय स्वाहा ध्वं शाय स्वाहा भगाय स्वाहार्यम्णे
स्वाहा.. (५)
जिस प्रकार सोम आदि देवता ऐश्वर्यवान हैं, हम भी वैसे ही ऐश्वर्यवान हो
जाएं. अग्नि के लिए स्वाहा. सोम देव के लिए स्वाहा. सविता देव के लिए स्वाहा.
यजुर्वेद - ११७