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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 114 of 421

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Page 114

पूर्वार्ध नौवां अध्याय
मित्रो नवाक्षरेण त्रिवृत ँ४ स्तोममुदजयत्तमुज्जेषं वरुणो दशाक्षरेण
विराजमुदजयत्तामुज्जेषमिन्द्र ऽ एकादशाक्षरेण त्रिष्टुभमुदजयत्तामुज्जेषं विश्वेदेवा
द्वादशाक्षरेण जगतीमुदजयँस्तामुज्जेषम्.. ( ३३ )
मित्र देव ने नव अक्षर से ज्ञान, कर्म और भक्ति पर विजय पाई, उसी प्रकार
हम भी उस पर विजय प्राप्त करें. वरुण देव ने दस अक्षरों से विराट् पर विजय पाई,
हम भी उसी प्रकार विजय पाएं. इंद्र देव ने ग्यारह अक्षर से त्रिष्टुभ् पर विजय पाई,
वैसे ही हम भी विजय प्राप्त करें. विश्व ने बारह अक्षर से जगती पर विजय पाई,
हम भी वैसे ही विजय पाएं. ( ३३ )
वसवस्त्रयोदशाक्षरेण त्रयोदश ँ४स्तोममुदजयँस्तमुज्जेष ँ४ रुद्राश्चतुर्दशाक्षरेण
चतुर्दश ँ४ स्तोममुदजयँस्तमुज्जेषमादित्याः पञ्चदशाक्षरेण पञ्चदश ँ४
स्तोममुदजयँस्तमुज्जेषमदितिः षोडशाक्षरेण षोडश ँ४ स्तोममुदजयत्तमुज्जेषं
प्रजापतिः सप्तदशाक्षरेण सप्तदश ँ४ स्तोममुदजयत्तमुज्जेषम्.. ( ३४ )
तेरह अक्षरों से वसुदेव ने त्रयोदश स्तोम को जीता, वैसे ही हम भी विजय प्राप्त
करें. रुद्र देव ने चौदह अक्षरों के प्रभाव से चौदह स्तोम ( गुणगान ) पर विजय पाई,
हम भी उस के प्रभाव से विजय पाएं. आदित्य देव ने पंद्रह अक्षरों के प्रभाव से पंद्रह
स्तोत्रों पर विजय पाई, हम भी वैसे ही विजय पाएं. अदिति देवता ने सोलह स्तोम
पर विजय पाई, हम भी उन पर विजय प्राप्त करें. सत्रह अक्षर से प्रजापति ने सत्रह
स्तोम पर विजय पाई, हम भी उस विजय का अनुकरण करें. ( ३४ )
एष ते निर्ऋते भागस्तं जुषस्व स्वाहाग्निनेत्रेभ्यो देवेभ्यः पुरः सद्भ्यः स्वाहा
यमनेत्रेभ्यो देवेभ्यो दक्षिणासद्भ्यः स्वाहा विश्वदेवनेत्रेभ्यो देवेभ्यः पश्चात्सद्भ्यः
स्वाहा मित्रावरुणनेत्रेभ्यो वा मरुन्नेत्रेभ्यो वा देवेभ्य ऽ उत्तरासद्भ्यः स्वाहा
सोमनेत्रेभ्यो देवेभ्य ऽ उपरिसद्भ्यो दुवस्वद्भ्यः स्वाहा.. ( ३५ )
हे पृथ्वी! यह आप का हिस्सा है. आप इसे स्वीकारिए. पृथ्वी माता के लिए
स्वाहा. पूर्व दिशा का नेतृत्व करने वाले अग्नि के लिए स्वाहा. दक्षिणी दिशा का
नेतृत्व करने वाले यम देव के लिए स्वाहा. पश्चिम दिशा में विश्व के लिए स्वाहा.
उत्तर दिशा का नेतृत्व करने वाले मित्र और वरुण देव या मरुद्गणों के लिए स्वाहा.
ऊपर और स्वर्गलोक में सोम के लिए स्वाहा. सभी देवगणों के लिए स्वाहा. ( ३५ )
ये देवा ऽ अग्निनेत्राः पुरःसदस्तेभ्यः स्वाहा ये देवा यमनेत्रा दक्षिणासदस्तेभ्यः स्वाहा
ये देवा विश्वदेवनेत्राः पश्चात्सदस्तेभ्यः स्वाहा ये देवा मित्रावरुणनेत्रा वा मरुन्नेत्रा
वोत्तरासदस्तेभ्यः स्वाहा ये देवाः सोमनेत्रा ऽ उपरिसदो दुवस्वन्तस्तेभ्यः स्वाहा.. ( ३६ )
अग्नि के साथ पूर्व दिशा का नेतृत्व करने वाले देवों के लिए स्वाहा. दक्षिण
दिशा का नेतृत्व करने वाले यम देव के लिए स्वाहा. पश्चिम दिशा का नेतृत्व करने
११४ - यजुर्वेद