यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपूर्वार्ध नौवां अध्याय
पृथ्वी माता आप को नमस्कार. पृथ्वी माता के लिए नमस्कार. आप के धन हमें
प्राप्त हों. आप की क्षमता, तेजस्विता व अनुशासन हमें प्राप्त हो. आप स्थिर और
धारणशील हैं. हम कृषि और अपनी कुशल क्षेम के लिए आप की शरण में आते
हैं. हम धन प्राप्ति व अपने पोषण के लिए आप की शरण में आते हैं. ( २२ )
वाजस्येमं प्रसवः सुषुवे ऽ ग्रे सोम १७ राजानमोषधीष्वप्सु.
ता ऽ अस्मभ्यं मधुमतीर्भवन्तु वय १७ राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः स्वाहा.. (२३)
सोम ओषधियों, जल समूह के राजा और बलवान हैं. परमपिता ने सब से पहले
सोम को प्रकटाया. वे सोमरस वाली ओषधियां हमें मधुमान बनाएं. हम राष्ट्र को
जागृत कर सकें. पुरोहितों के लिए स्वाहा. ( २३ )
वाजस्येमां प्रसवः शिश्रिये दिवमिमा च विश्वा भुवनानि सम्राट्.
अदित्सन्तं दापयति प्रजानन्स नो रयि १७ सर्ववीरं नियच्छतु स्वाहा.. (२४)
परमात्मा ने अन्न उपजाया है. उन्होंने सारे लोकों को शरण दी है. उन्होंने
स्वर्गलोक को शरण दी है. परमपिता देवताओं को आहुति प्रदान करने के लिए हमें
धन प्रदान करने की कृपा करें. परमपिता हमें सर्वाधिक वीर संतति प्रदान करें.
परमपिता ( शुभ कार्यों ) के लिए हमारी बुद्धि को प्रेरित करने की कृपा करें. ( २४ )
वाजस्य नु प्रसव ऽ आबभूवेमा च विश्वा भुवनानि सर्वतः.
सनेमि राजा परियाति विद्वान् प्रजां पुष्टिं वर्धयमानो अस्मे स्वाहा.. (२५)
परमपिता ने अन्न उपजाया. सारे लोकों को उपजाया. सब ओर से लोकों को
उपजाया. परमपिता सर्वज्ञाता, विद्वान्, प्रजा पालक और बढ़ोतरी करने वाले हैं. उन
परमपिता के लिए यह आहुति अर्पित है. ( २५ )
सोम १७ राजानमवसेग्निमन्वारभामहे.
आदित्यान्विष्णु १७ सूर्य ब्रह्माणं च बृहस्पति १७ स्वाहा.. (२६)
परमपिता ने हमारे लिए राजा, अग्नि आदि देवों को उपजाया. हम यज्ञ के
आरंभ में उन देवताओं की उपासना करते हैं. आदित्य देवता के लिए स्वाहा. विष्णु
देवता के लिए स्वाहा. सूर्य देवता के लिए स्वाहा. ब्रह्म देवता के लिए स्वाहा
बृहस्पति देव के लिए स्वाहा. ( २६ )
अर्यमणं बृहस्पतिमिन्द्रं दानाय चोदय.
वाचं विष्णु १७ सरस्वती १७ सवितारं च वाजिन १७ स्वाहा.. (२७)
हे परमात्मा! आप अर्यमा बृहस्पति और इंद्र देव को दान के लिए प्रेरित करने
की कृपा कीजिए. विष्णु देव, सरस्वती देवी, सविता देव के लिए वाणी सहित
स्वाहा. ( २७ )
११२ - यजुर्वेद 632/7