Skip to content
SarvaKosh
वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 9 of 314

Read in context
Page 9

यत्किञ्चित्
वेदान्तसार वेदान्तदर्शन का प्रकरणग्रन्थ है। इसके 38 खण्डों में ग्रन्थकार
ने वेदान्तदर्शन के सिद्धान्तों का सरलरूप में प्रतिपादन करने का प्रयास
किया है। इससे पूर्व ब्रह्मसूत्रादि में प्रतिपादित वेदान्त के सिद्धान्तों को
समझना सामान्य व्यक्ति के लिए दुष्करकार्य हो गया था। इसीकारण आचार्य
सदानन्द ने वेदान्तसार की रचना की आवश्यकता अनुभव की जो अत्यन्त
लोकप्रिय हुई। इस पुस्तक की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि
वेदान्तदर्शन के अध्ययन हेतु प्रायः सभी विश्वविद्यालयों ने इसे स्नातकोत्तर
पाठ्यक्रम में निर्धारित किया हुआ है।
यद्यपि इस ग्रन्थ पर अनेक विद्वानों ने अपनी लेखनी चलाकर इसे
पाठकों के लिए सुगम बनाने का प्रयास किया है, तथापि अपने विद्यार्थी
जीवन से ही इसे नूतनशैली में प्रस्तुत करने की मेरी तीव्र अभिलाषा थी।
इससे पूर्व प्रकाशित सांख्यकारिका के संस्करण को छात्रसमुदाय में जो
अपनत्व एवं प्रशंसा प्राप्त हुई, साथ ही उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान ने
उसकी सरल डायग्राम पद्धति की सराहना करते हुए उसे साहित्य पुरस्कार
प्रदान किया, इन दोनों बातों से उत्साहित होकर वेदान्तसार की व्याख्या भी
उसी शैली से प्रस्तुत करने का मैंने संकल्प किया।
ईश्वर की असीम अनुकम्पा से आज यह पुस्तक आपके हाथ में है
इससे न केवल मैं रोमांचित हूँ, अपितु असीम आनन्द का अनुभव कर रहा
हूँ। निश्चय ही इसे भी पूर्व प्रकाशित पुस्तकों के समान ही विद्वानों के हृदय
में स्थान प्राप्त होगा।
यहाँ 108 पृष्ठों की विस्तृत भूमिका में जहाँ वेदान्त-विषयक अनेक
जिज्ञासाओं का समाधान किया गया है। वहीं मूलग्रन्थ के रूप को सुरक्षित
रखते हुए विषय को स्पष्ट किया गया है। सरलता की दृष्टि से मुख्य
खण्डों को उपखण्डों में विभाजित किया गया है। प्रखण्डों के विभाजन में
विषय-विशेष के सर्वांगीण विवेचन की दृष्टि ही प्रमुख रही है।
पूर्व प्रतिपादित विषय को अग्रिम विषय के साथ जोड़ने के लिए
अवतरणिका, पुनः पदच्छेद एवं हिन्दी अनुवाद के बाद 'चन्द्रिका' हिन्दी
व्याख्या में विषय का सर्वांगीण एवं विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है।