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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 51 of 314

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Page 51

भूमिका ३७
बैकुण्ठाचार्य वंश में उत्पन्न रंगमाचार्य की कन्या थी। इसका नाम तोतारम्बा
देवी था। इनके चार पुत्रों में सबसे बड़े रंगराजाध्वरी थे।
अप्ययदीक्षित ने अपने ग्रन्थों में पिता, पितामह तथा मातामह आदि का
विस्तारपूर्वक परिचय दिया है। रंगराजाध्वरी सभी विद्याओं में निपुण थे।
उनका पाण्डित्य असाधारण था। उन्होंने अपने पुत्र अप्ययदीक्षित को स्वयं
विभिन्न विषयों की शिक्षा प्रदान की। इस बात को अप्ययदीक्षित ने स्वयं
स्वीकार किया है-
तन्मूलानिह संग्रहेण कतिचित्सिद्धान्तभेदान्धियः।
शुद्धयै सङ्कलयामि तातचरणव्याख्यावचः ख्यापितान्॥
रंगराजाध्वरी ने 'अद्वैतविद्यामुकुर' तथा 'विवरणदर्पण' नामक अद्वैतमत
का प्रतिपादन करने वाले दो महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की संरचना की। इसमें न्याय,
वैशेषिक, सांख्य आदि मतों का खण्डन करके अद्वैतमत की स्थापना की गई
है।
(४०) आचार्य अप्ययदीक्षित-शङ्कराचार्य के परवर्ती विद्वानों में अद्वैत
सम्प्रदाय की परम्परा में अप्ययदीक्षित का नाम अग्रगण्य है। ये आलंकारिक,
वैयाकरण एवं धुरन्धर दार्शनिक थे। ये अकबर और जहाँगीर के शासनकाल
में हुए। इनका जन्म सन् 1550 ई० में हुआ। इनके पिता रंगराजाध्वरि तथा
पितामह आचार्यदीक्षित थे। इनके छोटे भाई का नाम अच्छान दीक्षित था।
यद्यपि इन्हें अपने पिता एवं पितामह से अद्वैतमत की शिक्षा प्राप्त हुई थी
तथापि ये परम शिवभक्त थे। इन्हें विजयनगर राज्य के सभी राजाओं से
अत्यधिक सम्मान प्राप्त हुआ। ये सिद्धान्तकौमुदीकार भट्टोजिदीक्षित के गुरु
थे। कुछ समय तक ये दोनों साथ-साथ काशी में रहे। अपने मृत्युकाल में
इन्होंने चिदम्बरम् जाने की इच्छा व्यक्त की। इनकी मृत्यु 72 वर्ष की आयु
में सन् 1622 ई० में हुई। मृत्यु के समय इनके ग्यारह पुत्र तथा छोटे भाई
के पौत्र नीलकण्ठदीक्षित पास ही उपस्थित थे।
इन्होंने अलंकार, व्याकरण, मीमांसा, वेदान्त आदि विभिन्न विषयों पर
लगभग 104 ग्रन्थों की रचना की। वे सभी वर्तमान समय में उपलब्ध नहीं
हैं। प्राप्य ग्रन्थों का यहाँ नामोल्लेख किया जा रहा है-(1) कुवलयानन्द
('चन्द्रालोक' नामक अलंकार ग्रन्थ की विस्तृत व्याख्या), (2) चित्रमीमांसा
(अर्थचित्रविषयक ग्रन्थ), (3) वृत्तिवार्तिक (अभिधा, लक्षणा शब्दशक्ति
विवेचन, (4) नामसंग्रहमाला (आलंकारिक कोश), (5) नक्षत्रवादावली