वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
by सदानन्द योगीन्द्र
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in contextभूमिका २७
मन्दिर बनवा कर उसमें शारदादेवी की स्थापना की। इसके साथ ही स्थापित
मठ कोशृंगेरीमठ के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त हुई तथा अपने शिष्य सुरेश्वराचार्य
को इस मठ में आचार्य पद पर नियुक्त किया। इन्हीं दिनों माता की मृत्यु
निकट जानकर माता को दिये वचन के अनुसार वापस घर आकर माता की
अन्त्येष्टिक्रिया सम्पन्न की। इनके पिता का देहान्त इनकी तीन वर्ष की आयु
में ही हो गया था।
पुनःशृंगेरीमठ में वापस आए तथा वहाँ से पुरी जाकर गोवर्धनमठ की
स्थापना की एवं अपने प्रथम शिष्य पद्मपादाचार्य को मठाधिपति नियुक्त
किया। चोल एवं पाण्ड्यदेश के राजाओं की सहायता से इन्होंने दक्षिण में
शाक्त, गाणपत्य तथा कापालिक सम्प्रदाय के अनाचारों को दूर किया।
तत्पश्चात् इन्होंने उत्तरभारत की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में उज्जैन में होने
वाली भैरवों की भीषणसाधना को बन्द किया। पुनः गुजरात आकर
द्वारकामठ की स्थापना करके अपने शिष्य हस्तामलकाचार्य को आचार्य पद
पर प्रतिष्ठित किया।
पुनः गांगेय प्रदेश के पण्डितों को परास्त करके काश्मीर के शारदाक्षेत्र में
आकर वहाँ के पण्डितों को परास्त करके अपने मत की स्थापना की।
तत्पश्चात् आसाम के कामरूप स्थान में जाकर शैवों से शास्त्रार्थ किया।
पुनः बदरिकाश्रम आकर ज्योतिर्मठ की स्थापना करके अपने शिष्य
तोटकाचार्य को वहाँ का मठाधीश नियुक्त किया। वहाँ से केदारक्षेत्र आए,
जहाँ इन्होंने कुछ दिन बाद 32 वर्ष की आयु में निर्वाण प्राप्त किया।
यद्यपि शङ्कराचार्य के नाम से लिखे गए 272 ग्रन्थ बताए जाते हैं, किन्तु
यह कहना कठिन है कि वे सभी आद्य शङ्कराचार्य द्वारा लिखे गए, क्योंकि
बाद में शङ्कराचार्य उपाधिधारी विद्वानों ने भी ग्रन्थों की रचना की। जिन्होंने
अपने पूरे नामों का उल्लेख नहीं किया। पुनरपि अधिकांश विद्वत्सम्मत ग्रन्थों
के नाम इसप्रकार हैं-
ब्रह्मसूत्रभाष्य, उपनिषद्भाष्य (ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य,
ऐतरेय, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, श्वेताश्वतर इत्यादि) गीताभाष्य,
विष्णुसहस्रनामभाष्य, सनत्सुजातीयभाष्य, हस्तामलकभाष्य, ललितात्रिशती
भाष्य, विवेकचूड़ामणि, प्रबोधसुधाकर, उपदेशसाहस्री, अपरोक्षानुभूति,