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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 234 of 314

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Page 234

२२० वेदान्तसार
(9) तार्किक से अभिप्राय न्यायसिद्धान्त के मतावलम्बी विद्वानों से है।
(10) प्रस्तुत अंश के अभिप्राय को इसप्रकार भी प्रदर्शित कर सकते
हैं—
चित्र-४६
आत्मा
(1) पुत्र ───→ श्रुति ──→ आत्मा वै जायते पुत्रः
(साधारण व्यक्ति) ── तर्क ──→ अपने समान ही पुत्र के प्रति प्रेम
── अनुभव──→ पुत्र के नष्ट होने पर 'मैं नष्ट हो गया'
(2) शरीर ───→ श्रुति ──→ सः वा एष पुरुषोऽन्नरसमयः
(चार्वाक) ── तर्क ──→ आग में जलते पुत्र को छोड़कर स्वयं को बचाना
── अनुभव──→ मैं पतला हूँ, मैं मोटा हूँ
(3) इन्द्रिय ───→ श्रुति ──→ ते ह प्राणा प्रजापतिः पितरमेत्य ब्रूयुः
(चार्वाक) ── तर्क ──→ इन्द्रियों के बिना शरीर में गति का अभाव
── अनुभव──→ मैं काना हूँ, मैं बहरा हूँ
(4) प्राण ───→ श्रुति ──→ अन्योऽन्तर आत्मा प्राणमयः
(चार्वाक) ── तर्क ──→ प्राणों के बिना इन्द्रियों में गति का अभाव
── अनुभव──→ मैं भूखा हूँ, मैं प्यासा हूँ
(5) मन ───→ तर्क ── अन्योऽन्तर आत्मा मनोमयः (श्रुति)
(चार्वाक) ────── मन की अनुपस्थिति में इन्द्रियों द्वारा कार्य न
────────── कर पाना, मैं सङ्कल्पवान् हूँ। (अनुभव)
(6) बुद्धि ───→ तर्क ── अन्योऽन्तर आत्मा विज्ञानमयः (श्रुति)
(बौद्ध) ────── कर्ता के अभाव में करण की शक्ति का
────────── अभाव, मैं कर्ता, मैं भोक्ता। (अनुभव)
(7) अज्ञान ─── तर्क ── अन्योऽन्तर आत्माऽऽनन्दमयः (श्रुति)
(मीमांसक, ────── बुद्धि आदि का भी अज्ञान में लय होता है।
नैयायिक) ────── मैं अज्ञानी हूँ (अनुभव)
(8) अज्ञानोपहितचैतन्य ──→ प्रज्ञानघन एवानन्दमयः (श्रुति)
(भाट्ट मीमांसक) ── सुषुप्ति अवस्था में ज्ञान अज्ञान दोनों की स्थिति
────────── का रहना। (तर्क)
────────── मैं स्वयं को नहीं जानता हूँ (अनुभव)
(9) शून्य ───→ ── असदेवेदमग्र आसीत् (श्रुति)
(बौद्ध) ────── सुषुप्ति अवस्था में सबका अभाव (तर्क)
────────── मैं सुषुप्ति अवस्था में नहीं था। (अनुभव)