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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 219 of 314

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Page 219

स्थूलसृष्टि प्रक्रिया २०५
महातलपातालनामकानामधोऽधोविद्यमानानां लोकानां ब्रह्माण्डस्य
तदन्तर्वर्तिचतुर्विधस्थूलशरीराणां तदुचितानामन्नपानादीनां चोत्पत्तिर्भवति।
चतुर्विधशरीराणि तु जरायुजाण्डजोद्भिज्जस्वेदजाख्यानि। जरायुजानि
जरायुभ्यो जातानि मनुष्यपश्वादीनि। अण्डजान्यण्डेभ्यो जातानि
पक्षिषन्नगादीनि। उद्भिज्जानि भूमिमुद्भिद्य जातानि लतावृक्षादीनि।
स्वेदजानि स्वेदेभ्यो जातानि यूकामशकादीनि॥१६॥
पदच्छेद- एतेभ्यः पञ्चीकृतेभ्यः भूतेभ्यः भूभुवः-स्वः-महः-जनः-तपः-
सत्यम्-इति एतत् नामकानाम् उपर्युपरि विद्यमानानाम्
अतल-वितल-सुतल-रसातल- तलातल-महातल-पाताल-नामकानाम् अधोऽधः
विद्यमानानाम् लोकानाम्, ब्रह्माण्डस्य तद् अन्तर्वर्ति-चतुर्विध-स्थूलशरीराणाम्
तद् उचितानाम् अन्नपान-आदीनाम् च उत्पत्तिः भवति।
चतुर्विध-शरीराणि तु जरायुज-अण्डज-उद्भिज्ज-स्वेदज-आख्यानि।
जरायुजानि-जरायुभ्यः जातानि, मनुष्य-पशु-आदीनि। अण्डजानि-अण्डेभ्यः
जातानि, पक्षि-पन्नग-आदीनि। उद्भिज्जानि-भूमिम् उद्भिद्य जातानि लता
वृक्ष-आदीनि। स्वेदजानि-स्वेदेभ्यः जातानि, यूका मशक-आदीनि।।16।।
अनुवाद-इन पञ्चीकृत महाभूतों में भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः,
सत्यम् इत्यादि नाम वाले ऊपर-ऊपर विद्यमान लोकों की और अतल,
वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल नामक अधोवर्ती
भुवनों की, ब्रह्माण्ड की तथा उनमें विद्यमान चार प्रकार के स्थूलशरीरों की
एवं उनके योग्य अन्नपान आदिकों की उत्पत्ति होती है।
जबकि जरायुज, अण्डज, उद्भिज्ज एवं स्वेदज नामक चार प्रकार के
(स्थूल) शरीर हैं। जरायु से उत्पन्न होने वाले मनुष्य, पशु आदि जरायुज
(नामक स्थूलशरीर) हैं। अण्डों से उत्पन्न होने वाले पक्षी, सर्प आदि
अण्डज हैं। पृथिवी को भेदकर उत्पन्न होने वाले लता, वृक्ष आदि उद्भिज्ज
हैं तथा पसीने से पैदा होने वाले जूँ, मच्छर आदि स्वेदज (नामक स्थूल
शरीर) हैं।
'चन्द्रिका'-उपर्युक्त गद्यखण्ड का अर्थ स्पष्ट होने से व्याख्या की
आवश्यकता नहीं है।
विशेष-(1) प्रस्तुत अंश में भूः आदि सात ऊर्ध्वलोक, पाताल आदि
सात अधोलोक, इसप्रकार कुल चौदहभुवन, उनसे निर्मित सम्पूर्णब्रह्माण्ड तथा
उन लोकों में विद्यमान चार प्रकार के स्थूलशरीर-जरायुज, अण्डज, उद्भिज्ज