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वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshan with Prashastapada Bhashya

by महर्षि कणाद / महर्षि प्रशस्तपाद

Source: चौखम्बा संस्कृत सीरीज · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished759 pages

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Page 740

॥ अथ समवायपदार्थनिरूपणम् ॥
प्रशस्तपादभाष्यम्
अयुतसिद्धानामाधार्याधारभूतानां यः सम्बन्ध इह-
प्रत्ययहेतुः स समवायः । द्रव्यगुणकर्मसामान्यविशेषाणां
कार्यकारणभूतानामकार्यकारणभूतानां वाऽयुतसिद्धानामाधार्याधार-
एक आश्रय एवं दूसरा आश्रित इस प्रकार के दो अयुतसिद्धों का
जो सम्बन्ध 'यह (आश्रित) यहाँ (आश्रय में) है' इस प्रकार के प्रत्यय
का कारण हो, वही सम्बन्ध 'समवाय' है । (विशदार्थ यह है कि) द्रव्य,
गुण, कर्म, सामान्य और विशेष इन सभी पदार्थों में से जो (दो वस्तु
यथासम्भव) कार्यकारणभावापन्न हों अथवा स्वतन्त्र ही हों, किन्तु अयुतसिद्ध
न्यायकन्दली
अन्तर्व्याप्तमिदं विश्वंसंहारोत्पत्तिहेतवे ।
निर्मलज्ञानदेहाय नमः सोमाय शम्भवे ॥
समवायनिरूपणार्थमाह- अयुतसिद्धानामाधार्याधारभूतानां कार्यकारणभूतानाम-
कार्यकारणभूतानां यः सम्बन्ध इहप्रत्ययहेतुः स समवायः । तदेतत्कृतव्याख्याने-
मुद्देशावसरे । के ते अयुतसिद्धा येषां सम्बन्धः समवायो भवेत् ? अत आह-
द्रव्यगुणकर्मसामान्यविशेषाणामिति । कार्यकारणभूतानामकार्यकारणभूतानामिति
नियमकथनम् । अवयवावयविनामनित्यद्रव्यतद्गुणानां नित्यद्रव्यतत्समवेतानाम्-
नित्यगुणानां कर्मतद्वतां कार्यकारणभूतानां समवायः, नित्यद्रव्यतद्गुणानां सामान्य-
अन्तःकरण के मालिन्य को समूल नाश करनेवाले एवं विश्व की उत्पत्ति,
स्थिति और विनाश के हेतु एवं विशुद्ध विज्ञानरूप शरीरवाले (क्षित्यादि आठ
मूर्त्तिक शिवों में से) सोममूर्ति स्वरूप भगवान् शम्भु को मैं प्रणाम करता हूँ ।
"अयुतसिद्धानामाधार्याधारभूतानां यः सम्बन्ध इहप्रत्ययहेतुः स समवायः" यह
सन्दर्भ समवाय के निरूपण के लिए लिखा गया है । इस पङ्क्ति की व्याख्या इसी
ग्रन्थ के उद्देश प्रकारण में कर दी गयी है । "अयुतसिद्ध' कौन-कौन से पदार्थ
हैं ? जिनका सम्बन्ध समवाय होगा ? इसी प्रश्न का उत्तर "द्रव्यगुणकर्म-
सामान्यविशेषाणाम्" इत्यादि से दिया गया है । इस वाक्य में 'किन वस्तुओं में
समवाय सम्बन्ध होता है' इस प्रसङ्ग में 'नियम' को दिखलाने के लिए
"कार्यकारणभूतानामकार्यकारणभूतानाम्" यह वाक्य लिखा गया है । उस वाक्य
के 'कार्यकारणभूतानाम्' इस पद के द्वारा यह नियम दिखलाया गया है कि
कारणों में कार्य का समवाय होता है, अर्थात् कार्यकारणभावापन्न वस्तुओं में से
अवयवरूप कारणों में से अवयवीरूप कार्य का एवं अनित्य द्रव्यरूप कारण
और उनमें होनेवाले गुणों का एवं नित्य द्रव्य और उनमें उत्पन्न होनेवाले
गुणों का एवं क्रियाश्रय और क्रिया का ही समवाय सम्बन्ध होता है । एक-