सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

Devanagarihipublished648 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 648 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 13

चिन्मन्त्री

१देवता तपस्वी ब्राह्मणको अमर-फल देता है... २६
२तपस्वी-ब्राह्मण महाराजा भर्तृहरिको अमरफल देता है२८
३महाराजा भर्तृहरि रानी पिङ्गलाको अमर फल देते हैं२९
४रानी अपने उपपति दारोगाको अमरफल देती है३१
५दारोगा अपनी प्रणयिनी वेश्याको अमरफल देता है३२
६वेश्या महाराजा भर्तृहरिको अमरफल देती है३३
७महाराजा भर्तृहरिको संसारसे विरक्ति हो जाती है३४
८धनके लिये अनेक उपाय किये, पर एक कानी कौड़ी
भी न मिलो। तृष्णा ! अब तो पीछा छोड़ !१२
९संसारमें स्त्री ही सब दुःखोंका कारण है... २४
१०द्विदावस्थामें वैराग्य ।... ४१
११सुखेश्वर्यमें वैराग्य ।... ४२
१२बुद्धापि में तृष्णा ।... ४३
१३सूरज और चन्द्रमाकी पराधीनता ।... ४८
१४कामदेव मरेको भी मारता है ।... ५३
१५ब्रह्माका अमोघा पर मोहित होना ।... ५४