तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
by सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत')
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अध्याय पृष्ठ
३. काम
१. गुप्त - प्रेम (पूर्वराग) .... .... 245
१०९. सौन्दर्य की चोट ... ... 245
११०. संकेत - परिचय ... ... 247
१११. मिलन का सुख ... ... 249
११२. सौन्दर्य की सुप्रशंसा ... ... 251
११३. प्रेम की महिमा ... ... 253
११४. लज्जा का त्याग ... ... 255
११५. प्रवाद का परिज्ञान ... ... 257
२. पातिव्रत्य .... .... 259
६. असह्य वियोग ... ... 259
११७. विरहिणी का विलाप ... ... 261
११८. वेदनापूर्ण नेत्र ... ... 263
११९. पीलेपन की व्यथा ... ... 265
१२०. वियोग में विरहाधिक्य ... ... 267
१२१. एकाकी में स्मरण ... ... 269
१२२. स्वप्नावस्था का वर्णन ... ... 271
१२३. सान्ध्य-वेदना ... ... 273
१२४. अंग-सौन्दर्य की क्षति ... ... 275
१२५. स्वगत-संलाप ... ... 277
१२६. मान-भंग ... ... 279
१२७. संयोग की उत्कट अभिलाषा ... ... 281
१२८. संकेताभिव्यक्ति ... ... 283
१२९. सम्भोगाभिलाषा ... ... 285
१३०. हृदय पर क्रोध ... ... 287
१३१. प्रणय-कलह ... ... 289
१३२. प्रणय कलह की सूक्ष्मता ... ... 291
१३३. प्रणय कलह का आनन्द ... ... 293
तमिऴ् लिपि ... ... 311
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