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सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

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दिन और रात के काम

पर रगड़ना चाहिए। इससे चेहरा चमकदार हो जाता है और भुर्रियाँ मिट जाती हैं।

दुनिया में आँखें बड़ी चीज हैं। हाथ मुँह धोने के समय आँखों को साफ ताजा पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। छँटि आँखों की सफाई मार-मार कर आँखें धोना अच्छा है। आँखले के पानी से आँखें धोने से आँखों की रोशनी तेज होती है। कभी-कभी प्याज का टुकड़ा आँखों पर मलना चाहिए। इससे जहरीला पानी निकल जाता है। असली रसौत भी आँखों में हर आठवें दिन आँजना अच्छा है। (सँथा नमक और मिश्री दोनों बराबर लेकर खव बारीक घोट लो। उनका सुर्मा आँखों की बड़ी बढिया दवा है) रोज सलाई भरकर लगाने से आँखें साफ और तेज रहती हैं।

कसरत करने से शरीर फुर्तीला, सुईल और सुखी रहता है। हाजमा सुधरता है। बुढ़ापा पास नहीं फटकता। दण्ड भरना, सुन्दर फेरना, बैठक लगाना, लाठी चलाना, दौड़ना, कुरती लड़ना, कबड्डी खेलना, ये सबसे अच्छी कसरतें हैं। इनमें कौड़ी भी खर्च नहीं होती। जब सांस जोर-जोर से आने लगे, थकावट मालूम पड़े, और साथे पर पसीना आ-जाय तब कसरत बन्द कर दो। ज्यादा कसरत करने से मांस, खॉसी, दमा, आदि रोग होजाते हैं। कसरत करके अच्छा मुखारक न खाने से शरीर मूख जाता है। भरे-पेट और रात में कसरत नहीं करना चाहिए। सर्दी में बराण्ड में और गर्मी में खुले मैदान