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सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

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सुगम चिकित्सा

६

चीज दिसाग रखी है। दांतों के अलावा सिर में २२ हड्डियाँ और घर का गुम्जग हैं। कपाल का आकार अंडे के समान है और हड्डी के जोड़ दानेदार हैं। अज्ञानी लोग इन्हें ब्रह्मा के लिये लेख बताते हैं। यह गुम्जग गले पर रखा है। रीढ़ की ऊपरवाली ७ हड्डियाँ ही को गला कहते हैं।

इस घर में १८० ऐसी चूल्हें हैं जिनपर जुड़ी हुई हड्डियाँ आसानी से इधर-उधर घूम सकती हैं। साथ ही हड्डियाँ मजबूती से बाँध कर रखी गई हैं कि कोई इधर से चूल्हा और बाँध उधर नहीं हो सकती। इन चूल्हों के पास एक अद्भुत थैली है जिसमें चिकनाई भरी रहती है और उससे वह रात-दिन चिकनी बनी रहती है, रगड़ से घिसती नहीं।

सिवाय दांतों के सारे घर की हड्डियाँ पतले चमड़े से ढकी हुई हैं। दूसरा ढकना मांस के पट्टे हैं। ये २०० हैं। इनका रंग लाल है। उनमें चारों ओर लोह बहता है। ये इस रीति ढकना से बने हैं जैसे बहुत-सा सूत इकट्ठा कर रखा हो। उनके अनेक रूप हैं। कुछ चपटे, कुछ लम्बे और कुछ नुकीले होते हैं। ये दो प्रकार के हैं। एक वे जो खुद ही हिलते-चलते रहते हैं; जैसे दिल और फेफड़ों में। हम सोते हैं तब भी ये चलते रहते हैं। कुछ हमारे हिलाने से हिलते हैं। देह का चलना-फिरना उठना-बैठना, फिरना इन्हीं पट्टों से हुआ करता है। मिहनत करने से ये पट्टे वाकतवर और बेकार बैठने से कमजोर हो जाते हैं। चमड़ा कोमल और चमकीला होता है। उसमें ऐसी चैतन्यता है कि