श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
by श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
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Read in context| २८ सितम्बर, १८८४ | परिच्छेद ९३ | ६५५ |
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श्रीरामकृष्ण के पास खड़े हुए।
सुरेन्द्र कारण (शराब) पीते हैं। पहले नम्बर बहुत बढ़ा-चढ़ा था। सुरेन्द्र की हालत देखकर श्रीरामकृष्ण को चिन्ता हो गयी थी। बिलकुल ही पीना छोड़ देने के लिए नहीं कहा, उन्होंने कहा, “सुरेन्द्र, देखो, जो पीना, श्रीदेवी को निवेदित करके पीना और उतना ही जिससे न पैर लड़खड़ायें और न सिर घूमे। उनकी चिन्ता करते करते फिर तुम्हें पीना बिलकुल ही अच्छा न लगेगा। वे स्वयं कारणानन्ददायिनी हैं। उन्हें पा लेने पर सहजानन्द होता है।”
सुरेन्द्र पास खड़े हैं। श्रीरामकृष्ण ने उनकी ओर दृष्टि करके कहा, तुमने कारण पान किया है। यह कहकर ही भाव में तन्मय हो गये।
शाम हो गयी। कुछ बहिर्मुख होकर श्रीरामकृष्ण माता का नाम लेकर आनन्दपूर्वक गाने लगे। बीच बीच में तालियाँ बजा रहे हैं। स्वर करके कह रहे हैं – “हरि बोल, हरि बोल, हरिमय हरि बोल, हरि हरि हरि बोल।”
फिर कहने लगे – “राम, राम, राम, राम, राम, राम, राम, राम, राम।”
श्रीरामकृष्ण अब प्रार्थना कर रहे हैं – “ऐ राम! हे राम! मैं भजन हीन हूँ, साधन हीन हूँ, ज्ञान हीन हूँ, भक्ति हीन हूँ, क्रिया हीन हूँ, राम! शरणागत हूँ। मैं देह-सुख नहीं चाहता। अष्ट-सिद्धि तो क्या, शत सिद्धियाँ भी नहीं चाहता। मैं शरणागत हूँ, शरणागत। बस वही करो, जिससे तुम्हारे पादपद्मों में शुद्धा भक्ति हो, और तुम्हारी भुवनमोहिनी माया से मैं मुग्ध न होऊँ। राम! मैं शरणागत हूँ।”
श्रीरामकृष्ण प्रार्थना कर रहे हैं और सब लोग टकटकी लगाये देख रहे हैं। उनका करुणामय स्वर सुनकर भक्त आँसू रोक नहीं सकते। श्रीयुत राम पास आकर खड़े हुए हैं।
श्रीरामकृष्ण – (राम के प्रति) – राम, तुम कहाँ थे?
राम – जी ऊपर था।
श्रीरामकृष्ण तथा भक्तों की सेवा के लिए राम ऊपर प्रबन्ध करने के लिए गये थे।
श्रीरामकृष्ण – (राम से, सहास्य) – ऊपर रहने की अपेक्षा क्या नीचे रहना अच्छा नहीं? नीची जमीन में ही पानी ठहरता है। ऊँची जमीन से पानी बह जाता है।
राम – (हँसते हुए) – जी हाँ।
छत पर पत्तलें पड़ चुकी हैं। श्रीरामकृष्ण और भक्तों को लेकर राम ऊपर गये और उन्हें आनन्द से भोजन कराया। उत्सव हो जाने पर, श्रीरामकृष्ण निरंजन, मास्टर आदि भक्तों को साथ लेकर अधर के यहाँ गये। वहाँ माँ आयी हुई हैं। आज महाष्टमी है। अधर की विशेष प्रार्थना है, श्रीरामकृष्ण उपस्थित रहें, जिससे उनकी पूजा सार्थक हो जाये।