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स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

by आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज

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DevanagariHindipublished519 pages

Page 462 of 519

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Page 462

तृतीयः निष्यन्दः ३६१
इस समस्त वर्ण—समुदाय को 'बीज' एवं 'योनि' में भी विभाजित किया गया
है। (क) अ से अ = बीज (स्वर समूह) (ख) क से क्ष = योनि (व्यञ्जन समूह)—
बीजयोन्यात्मकाद् भेदाद् द्विधा बीजं स्वरा मताः ।
कादिभिश्च स्मृता योनिः ..... ।। (मा० वि० ३.१०.११)
बीज—शिवभाव। योनि—शक्तिभाग—
'म बीजत्र शिवः शक्तियोंनिरित्यभिधीयते ।।' (३.१२)
नवधावर्ग भेदतः कहकर ८ के स्थान पर शब्दराशि के ९ वर्ग भी बताए गए हैं।
सामान्यतः वर्ग ८ ही है—'तदेव शक्तिभेदेन माहेश्वर्यादि 'चाष्टकम्' । 'क्ष' का रहस्य यह
है कि इसमें जो 'क' एवं 'श' वर्ण हैं उनमें 'क' शिव का वाचक है और 'स' शक्ति का
वाचक है । 'क' एवं 'स' का सम्मिलित रूप 'शिवशक्तियामल' (प्रकाश विमर्श का
संघट्ट) सूचित करता है और यह यामल, संघट्टण 'सामरस्य' ही सृष्टि, अस्तित्व एवं
विश्व की आत्मभूत सत्ता है—यह 'क्ष' कूटबीज है—
तदियत्पर्यन्त यन्मातृकायास्तत्त्वं तदेव ककार सकार प्रत्याहारेण अनुत्तरविसर्ग
संघट्टसारेण कूटबीजेन प्रदर्शितमन्ते ।। (शिवसूत्र वि० २.७)। शब्दराशि की ये अधि-
ष्ठात्री शक्तियाँ 'पीठेश्वरी' कहलाती है और प्राणियों को मायिक प्रपञ्च में हठपूर्वक
नचाती रहती है—
'करण्रचितिमध्यस्था ब्रह्मपाशावलम्बिकाः ।
पीठेश्वर्यो महाघोरा नर्तयन्ति मुहुर्मुहुः ।।'
कला—'कलाविलुप्तविभवो' में 'कला' क्या है? 'जब सर्वकर्तृत्व शक्ति संकुचित
होकर स्वल्पकर्तृत्व शक्ति बनकर आत्मा को परिमित कर देती है तब उसे 'कला' कहा
जाता है'—
'सर्वकर्तृताशक्तिः संकुचिता कतिपार्थमात्र परा ।
किंचित्कर्तारममुं कलयन्ती कीर्त्यते कला नाम ।।'
'षट्त्रिंशत्तत्त्वसन्दोह' —क्षेमराज
शब्द राशि के ९ वर्गों का विवरण—
| सं० | वर्ग | वर्ण | शक्ति |
| १ | अवर्ग | अ से अः | अमा |
| २ | कवर्ग | क से ङ | कामा |
| ३ | चवर्ग | च से ञ | चार्वङ्गी |
| ४ | टवर्ग | ट से ण | टङ्कधारिणी |
| ५ | तवर्ग | त से न | तारा |
| ६ | पवर्ग | प से म | पार्वती |
| ७ | यवर्ग | य, र, ल, व | यक्षिणी |
| ८ | शवर्ग | श, ष, स, ह | शारिका |
| ९ | क्षवर्ग | क्ष | कूटबीज |