सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
by श्रीमदप्पय्य दीक्षित
Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)
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Read in contextसकारणं अध्यासका विचार ] भाषानुवादसहित २४५
द्वितीया वृत्तिरध्यस्तरजतविषया, न त्विदमंशं विनाऽध्यस्तमात्रगोचरा सा । 'इदं रजतं जानामि' इति तस्या इदमर्थतादात्म्यापन्नरजतविषयत्वानुभवादिति केचित् ।
इदं तद्वृत्त्यवच्छिन्नचिन्मोहौ तत्तदन्विते ।
युगपद्रूप्यतद्वृत्ती कुर्वाते इति चाऽपरे ॥११४॥
कुछ लोग कहते हैं कि इदमवच्छिन्न चैतन्यमें और इदमंश-विषय वृत्तिसे अवच्छिन्न चैतन्यमें रहनेवाले अज्ञान रजत और रजतज्ञानरूपसे परिणत होते हैं ॥११४॥
अन्ये तु—यथा इदमंशावच्छिन्नचैतन्यस्थाऽविद्या रजताकारेण विवर्तते, एवमिदमंशविषयवृत्तिज्ञानावच्छिन्नचैतन्यस्थाऽविद्या रजतज्ञानाभासाकारेण विवर्तते, न त्विदमंशवृत्तित्वदनध्यस्तं रजतज्ञानमस्ति । तथा च रजतस्य अधिष्ठानगतेदंत्वसंसर्गभानवत्तज्ज्ञानस्याऽप्यधिष्ठानगतेदंत्वविषयत्वसंसर्गभानोपपत्तेः, न तस्याऽपीदंविषयत्वमभ्युपगन्तव्यम् ।
न च रजतत्ववदध्यस्तस्य रजतेदंत्वसंसर्गस्य रजतज्ञानगोचरत्वात्
'इदम्' और 'इदं रजतम्' ये दो ज्ञान होते हैं इस पक्षमें 'इदम्' इत्याकारक इदमाकारवृत्ति अध्यासकी कारणभूत है और 'इदं रजतम्' इत्याकारक दूसरी वृत्ति अध्यस्त रजतको अवगाहन करती है, इदमंशको छोड़कर केवल अध्यस्त पदार्थको अवगाहन नहीं करती है, क्योंकि 'मैं इस रजतको जानता हूँ' इस प्रकार उस वृत्तिमें इदमर्थके साथ तादात्म्यापन्न रजतविषयत्वका अनुभव होता है, ऐसा भी कुछ लोग कहते हैं ।
इतर लोग कहते हैं कि जैसे इदमंशसे युक्त चैतन्यमें रहनेवाली अविद्या रजताकारसे परिणत होती है, वैसे ही इदमंशविषयक वृत्तिसे अवच्छिन्न चैतन्यमें रहनेवाली अविद्या अध्यस्त रजतमात्रको विषय करनेवाली वृत्तिके आकारमें परिणत होती है, इदम् अंशकी वृत्तिके समान अध्यस्त रजतगोचरवृत्ति अनध्यस्त नहीं है अर्थात् रजतज्ञानाभासरूप रजतज्ञान प्रातिभासिक ही है । इसलिए जैसे रजतके अधिष्ठानमें रहनेवाले इदन्त्वका रजतमें संसर्गका भान होता है, वैसे ही रजतके ज्ञानमें भी अधिष्ठानगत इदन्त्वविषयत्वके संसर्गका भान होता है, अतः 'इदं रजतम्' इस द्वितीय ज्ञानको इदंविषयक नहीं मानना चाहिए ।
यदि शङ्का हो कि रजतत्वके समान अध्यस्त रजत और इदन्त्वके संसर्गमें रजतज्ञानकी विषयता होनेसे उस संसर्गके प्रतियोगी इदन्त्वमें भी रजतज्ञानकी