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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

by श्रीमदप्पय्य दीक्षित

Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)

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DevanagariHindipublished590 pages

Page 213 of 590

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Page 213

साक्षि-स्वरूपविचार ] भाषाऽनुवादसहित १८३


नृत्यशालास्थितो दीपः प्रभुं सभ्यांश्च नर्तकीम् ।
दीपयेदविशेषेण तदभावेऽपि दीप्यते ॥११॥

तथा चिदाभासविशिष्टाऽहंकाररूपं जीवं विषयभोगसाकल्यवैकल्याभिमानप्रयुक्तहर्षविषादवत्त्वात् नृत्याऽभिमानिप्रभुतुल्यम्, तत्परिसरवर्तित्वेऽपि तद्राहित्यात् सभ्यपुरुषतुल्यान् विषयान्, नानाविधविकारवत्त्वान्नर्तकीतुल्यां धियं च दीपयन् सुषुप्त्यादावहंकाराद्यभावेऽपि दीप्यमानः चिदाभासविशिष्टाहंकाररूपजीवभ्रमाधिष्ठानकूटस्थचैतन्यात्मा साक्षीति । एवं जीवाद्विवेचितोऽयं साक्षी न ब्रह्मकोटिरपि, किन्तु अस्पृष्टजीवेश्वरविभागं चैतन्यमित्युक्तं कूटस्थदीपे ।


प्रकाशमें बड़ा रूप, सभ्योंके प्रकाशमें मध्यम स्वरूप और नर्तकी आदिके प्रकाशमें निकृष्ट स्वरूपको धारण नहीं करता और स्वामी आदिके अभावमें भी स्वयं प्रकाशित रहता है, वैसे अहङ्कार प्रभु है, विषय सभ्य हैं और बुद्धि नर्तकी है—इनका साक्षी प्रकाश करता है और इनके अभावमें भी स्वयं प्रकाशित रहता है ) ।

इसी दृष्टान्तके अनुसार चैतन्यके आभाससे युक्त अहङ्काररूप जीव विषयभोगकी समग्रता और असमग्रताके अभिमानसे हर्ष या विषादयुक्त होता है, इसलिए जीव नृत्याभिमानी स्वामीके समान है, यद्यपि जीवके परिसरवर्ती विषय हैं, तथापि स्वामीकी समानताके साधक हर्ष, विषाद आदिके नहीं रहनेसे वे सभ्यपुरुषके समान ही हैं। अनेक प्रकारके विकारोंसे युक्त होनेसे बुद्धि नर्तकीके समान ही है। और जैसे ताल आदि देनेवाले पुरुष नर्तकीका अनुसरण करते हैं, वैसे ही इन्द्रियाँ भी बुद्धिका ही अनुसरण करती हैं, अतः ये ताल आदिधारी पुरुषके तुल्य हैं—इन सभीको प्रकाशित करता हुआ सुषुप्ति आदिमें अहङ्कार आदिके न रहनेपर भी स्वयं प्रकाशित होनेवाला चिदाभासविशिष्ट अहङ्काररूप जीवके भ्रमका अधिष्ठानभूत कूटस्थ चैतन्यरूप आत्मा साक्षी है। इसी प्रकार जीवसे पृथक्रूपसे प्रतिपादित यह साक्षी ब्रह्मकोटिमें भी प्रविष्ट नहीं होता है, किन्तु जीव और ईश्वरके विभागका आश्रय न करता हुआ चैतन्य ही है, ऐसा कूटस्थदीपमें कहा गया है।