Skip to content
SarvaKosh
सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary

by गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर)

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished222 pages

Page 70 of 222

Read in context
Page 70

विशेष—लिङ्ग से ऊपर और नाभि से नीचे पक्षी के अण्डे के समान समस्त
नाड़ियों का उत्पत्तिस्थान मूलकन्द है । इसी मूलकन्द से बहत्तर हजार नाड़ियों
की उत्पत्ति है । इनमें सर्वश्रेष्ठ सुषुम्णा है, सुषुम्णा से प्राण निकलने पर ब्रह्मलोक
तक गति होती है और जीवात्मा मोक्षस्वरूप—परमेश्वर अलख निरञ्जन शिव में
प्रतिष्ठित हो जाता है । दूसरी नाड़ियों से प्राण निकलने पर स्वकर्म के अनुसार
जीवात्मा को स्वर्गादि लोकों की प्राप्ति होती है । योगशिखोपनिषद् में वर्णित
नाड़ी-स्थिति-क्रम के अनुसार ही ( सिद्धसिद्धान्तपद्धति १ । ६८ में वर्णित )
नाड़ी-स्थिति का अर्थ किया गया है ।
गान्धारी हस्तिजिह्वा च तस्मान्नेत्रद्वयं गते । २१ ॥
पूषा चालम्बुषा चैव श्रोत्रद्वयमुपागते ॥ २२ ॥
सरस्वती तु या नाड़ी साजिह्वान्तं प्रसर्पति ॥ २३ ॥
( योगशिखोपनिषद् ५ । २१-२३ )
दस वायु ( प्राण ) और उनके स्थान
अथ दशवायवः । हृदये प्राणवायुरुच्छ्वासनिःश्वासकारो
हकारसकारात्मकश्चास्यैवावस्थाभेदे हठयोग इति संज्ञा, 'हकारः
कीर्त्तितः सूर्यष्ठकारश्चन्द्र उच्यते । सूर्याचन्द्रमसोर्योगाद्
हठयोगो निगद्यते ॥' गुदेत्वपानवायू रेचक.कुम्भकपूरकश्च
नाभौ समानवायुर्दीपकः पाचकश्च सर्वाङ्गे व्यानवायुग्र
सनवमनजल्पकारश्च उदानः नागवायु सर्वाङ्ग व्यापकश्चाल-
कश्च कूर्मवायुः कम्पकश्चचक्षुरुन्मेषकारकश्च कृकल उद्गारकः
क्षुत्कारकश्चदेवदत्तो मुखविजृम्भकः धनञ्जयो नादघोषक इति
दशवायववलोकनेन पिण्डोत्पत्तिर्नरनारीरूपः । ६८ ॥
शरीर में दस ( प्रधान ) वायु हैं । हृदय में प्राणवायु उच्छ्वास और
निःश्वास का संचालन करती है । यही प्राणवायु हकार और सकारात्मक है । यह
हकार की ध्वनि से बाहर जाती है, सकार की ध्वनि से भीतर आती है, यह हठयोग
की स्थिति है । हकार सूर्य और ठकार चन्द्र कहा जाता है, हकार और ठकार का
योग ही हठ ( प्राण )-साधना है । गुदादेश में अपान वायु रहती है, यह अपान
२८ ] [ सिद्धसिद्धान्तपद्धति