सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)
Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary
by गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर)
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Read in contextविषय पृष्ठ संख्या
तीसरा उपदेश ९२-१०२
[ पिण्डसंवित्ति ]
सप्त पाताल तथा अनेक लोकादि ... ... ६३
चार वर्ण आदि ... ... ६७
सप्तद्वीप तथा सप्त समुद्र ... ... ६६
नव खण्ड ... ... ६६
अष्टकुल पर्वत ... ... १००
नौ नदी तथा अन्य उपनदियाँ ... ... १००
नक्षत्रादि ... ... १०१
स्वर्ग-नरक-मुक्ति ... ... १०२
चौथा उपदेश १०३-११७
[ पिण्डाधार ]
कुलाकुलसामरस्य ... ... १०४
कुलशक्ति ... ... १०४
आज्ञावती पराशक्ति ... ... १०६
अनन्त शक्तिमान् ... ... १०७
आकाशादि की कुण्डलिनी से उत्पत्ति ... ... ११०
मध्याशक्तिप्रबोधन ... ... १११
स्थूल-सूक्ष्म कुण्डलिनी ... ... ११४
पाँचवां उपदेश ११८-१४२
[ पिण्डपदसामरस्य ]
परम पद ... ... ११८
गुरु द्वारा सन्मार्गदर्शन ... ... १२०
गुरु और सामरस्य ... ... १२१
निरुत्थान-प्राप्ति का उपाय ... ... १२२
पिण्डसिद्धि का वेष ... ... १२४
परमपद की प्राप्ति ... ... १२६
योगमार्ग ... ... १२६
सहजसंयमसोपायाद्वैतज्ञान ... ... १२८