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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 77 of 526

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Page 77

( २७ )

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
शुक्ल-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल३४१अश्वों के कुठारवादि दोष उत्पन्न होने के कारण३४५
अनिष्टकारक अश्वों के लक्षण,,घोड़े की अच्छी तथा बुरी चाल होने में शिक्षक की कारणता का निर्देश,,
धूमकेतु-संज्ञक भौंरी के लक्षण व फल,,घोड़ों के सुशिक्षक के लक्षण,,
कृतान्त-संज्ञक भौंरी के लक्षण व फल,,अश्व-सुशिक्षक के कृत्यों का निर्देश३४६
घोड़े के पूंछ के शुभाशुभ फल,,अन्यथा ताडन करने से अनिष्ट,,
भौरियों के अशुभप्रद स्थानों का निर्देश३४२उत्तम और हीन घोड़े की गति का प्रमाण,,
आवर्त्त भौरियोंके शुभप्रद स्थानों का निर्देश,,उत्तमादि मण्डलों के प्रमाणों का निर्देश३४७
सूर्य-चन्द्रसंज्ञक भौंरी के स्थानानुसार शुभाशुभ फल का निर्देश,,ऋतु के भेद से अश्वशिक्षा के समय में भेद का निर्देश,,
शुभाशुभ फलप्रद भौंरो के स्थानों का निर्देश,,वर्षर्तु में और विषम भूमि में घोड़े को चलाने का निषेध,,
एकशृङ्गी तथा एकरश्मि-संज्ञक भौंरी के लक्षण व फल३४३उत्तमगति से अश्व के फल का निर्देश,,
कीलोत्पाटी व मध्यम आवर्त्तों के लक्षण व फल,,थके हुए अश्व को धीरे-धीरे चलाने का एवं उनके भक्षणार्थ हितकारक पदार्थ देने का निर्देश,,
पञ्चकल्याण व अष्टमङ्गल अश्व के लक्षण व फल,,मोच आये अंग पर घोड़े को चाबुक न मारने का निर्देश३४८
श्यामकणं अश्व के लक्षण,,मार्ग से चलकर आये हुए घोड़े को गुड़ तथा लवण देने का निर्देश,,
जयमङ्गल अश्व के लक्षण३४४पसीना शान्त होने पर लगाम उतारने का निर्देश,,
निन्दित अश्व के लक्षण,,घोड़ों के अङ्गों को मलकर फेरने का निर्देश,,
अश्वों की श्रेष्ठ गति के लक्षण,,घोड़ों को मद्य व मांसरस देने का फल,,
निन्दित 'दलभंजी' अश्व के लक्षण,,
स्निग्ध वर्ण होने से सर्व वर्णगत दोष-नाशकता का निर्देश३४५
आवर्त्तादिदोष से दूषित होने पर भी पूजनीय अश्व के लक्षण,,