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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 68 of 526

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Page 68

( १८ )

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
स्त्रियों के नैमित्तिक कृत्यों का निर्देश२४०जात्यनुकूल पूज्य देव तथा गृह के गृह बनाने के स्थान का निर्देश२४७
रजस्वला स्त्री की शुद्धि के समय का निर्देश२४१ग्राम के चौराहे पर विष्णु आदि के मन्दिर बनाने का निर्देश,,
पतिव्रता स्त्रियों के कर्त्तव्यों का निर्देश,,मेरु आदि मन्दिर के १६ प्रकारों का सलक्षण निर्देश,,
पति के समान अन्य स्वामी और पति-सेवा समान अन्य सुख का निषेध२४२मेर्वादिकों के अनुसार उनके मण्डपों के प्रमाणों का निर्देश२४८
शूद्र धर्म का निर्देश”ध्यान योग में प्रतिमा की साधन-मुख्यता का निर्देश,,
संकर जाति के नियम का निर्देश”बालु से लेकर धातु पर्यन्त की बनी प्रतिमाओं की उत्तरोत्तर स्थिरता की अधिकता का निर्देश,,
राजा को स्वर्णकारादिकों को सदा कार्य में नियुक्त करने निर्देश२४३शास्त्रोक्त तथा अन्यथा रीति से बनी प्रतिमा के फल,,
मदिरागृह को ग्राम से पृथक् रखने का निर्देश२४४देव-प्रतिमा की शुभकारिता मानव-प्रतिमा की अशुभकारिता का निर्देश,,
दिन में मद्य पीने के निषेध का निर्देश,,सात्त्विकी आदि तीन प्रकार की प्रतिमाओं का निर्देश२४९
वृक्षारोपण और पोषण के नियम,,सात्त्विकी प्रतिमा के लक्षण,,
ग्राम्य वृक्षों के नामों का निर्देश,,राजसी प्रतिमा के लक्षण,,
बगीचा लगाने के स्थान का निर्देश२४५तामसी प्रतिमा के लक्षण,,
वृक्षों को ऋतुभेद से सींचने के समयों का निर्देश,,अंगुलादिकों के प्रमाणों का निर्देश२५०
वृक्ष के नष्ट न होने का उपाय,,वामनी, मानुषी, दैवी, राक्षसी प्रतिमाओं के लक्षण,,
वृक्षों के फल-पुष्प-वृद्धि का उपाय,,स्त्री देवता तथा वामन भगवान की प्रतिमा की ऊँचाई का प्रमाण,,
आरण्य-वृक्षों के रोपण के स्थान और नामों का निर्देश,,नर-नारायणादि की प्रतिमाओं की ऊँचाई का प्रमाण,,
कूपादि में उतरने योग्य सीढ़ियों के बनाने का निर्देश२४६
देश में विपुल जल होने एवं पुल आदि बनवाने का प्रबन्ध करने का निर्देश,,