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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 60 of 526

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Page 60

( १० )

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
अतिक्रूरता आदि से अनिष्ट फल१६२हिंस्र पुरुषादि की उपेक्षा करने का निषेध१६६
अपने को अधिक श्रेष्ठ न मानना”चुगुलखोरी आदि दोषों से गुणियों के गुणों के ढंक जाने का निर्देश”
देवादिकों पर प्रभुत्व रखने का निषेध१६३बाल्यावस्था आदि में मां आदि के मरने में महापातक के फल का निर्देश”
देवादिकों के तिरस्कार उचित नहीं”दुःखप्रद विषयों का निर्देश”
युवती स्त्री, धन तथा पुस्तक को परहस्तगत करने का निषेध”सुखकारक न होनेवाली ६ बातों का निर्देश”
अल्प कारण से बड़े अर्थ का एवं अधिक धन-व्यय होने से कीर्ति के त्याग का निषेध”जीवन्मुक्त, खल या पशु के तुल्य के लक्षण१६७
बीर सैनिकों के दुर्वचन भी सहना”खल पुरुष के लक्षण”
विनोद में भी दुखी करनेवाले वचन बोलने का निषेध१६४आशाबद्ध लोगों के लिये जगत् की सम्पूर्ण वस्तु की प्राप्ति से भी कमी बोध होने का निर्देश”
कहने का असर न हो वाले से कुछ भी न कहने का निर्देश”धूर्त पुरुष के कर्मों का निर्देश”
बुरे व्यसनों से अलग न करने वाले नीच की नृशंसता”प्रीतिकारक व दुःखदायी पुत्र के लक्षण”
कुमित्र के लक्षण”प्रीति देनेवाली स्त्री के लक्षण१६८
कठोर वचन से मित्र के शत्रु बन जाने का निर्देश”आनन्ददायिनी तथा दुःखदायिनी माता के लक्षण”
स्वबलाधिक शत्रु को कन्धे पर भी ले चलने का निर्देश”आनन्ददायक पिता के लक्षण”
'मनुष्य का भूषण सुजनता है' इसका निर्देश१६५मित्र के लक्षण”
अश्वादिकों में वेगादिक गुणों की भूषणता तथा अन्यथा (विपरीत) होने पर दूषणता का निर्देश”मानहानिकारक कार्यों का निर्देश”
एक ही नायक आदि से ही परिवार आदि की शोभा का निर्देश”मैंने सेवा की है यह समझकर राजादि के साथ अधिक संसर्ग रखने का निषेध१६९
दुःखकारक कार्यों का निर्देश”
स्त्रियों को पति के प्रेम से ही अधिक सुख मानने का निर्देश”