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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 469 of 526

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Page 469

चतुर्थाध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३८३

वृद्धि करके उन्हें खुश करता हुआ युद्ध में ढाल तथा कवच से अपने शरीर की रक्षा करता रहे।

पाययित्वा मदं सम्यक् सैनिकाञ्छौर्यवर्धनम् ।
उत्तेजितांश्च निर्द्वैधान् मन्त्रान् युद्धे नियोजयेत् ॥ ३५५ ॥

और अपने सैनिकों को शूरता बढ़ानेवाले मद (शराब) को अच्छी तरह से पिलाकर उत्तेजित करने के बाद मरने का सन्देह नहीं करनेवाले उन वीरों को युद्ध में नियुक्त करे।

नालिकास्त्रेण खड्गाद्यैः सैनिकैः पातयेदरीन् ।
कुन्तेन सादी बाणेन रथगो गजगोऽपि च ॥ ३५६ ॥

युद्ध में नालास्त्र (बन्दूक-तोप) आदियों की योजना—पैदल सैनिक बन्दूक या खङ्ग आदि से, घुड़सवार भाले से, रथ और हाथी पर सवार हुये सैनिक बाण से शत्रुओं पर प्रहार करें।

गजो गजेन यातव्यस्तुरगेण तुरङ्गमः ।
रथेन च रथो योज्यः पत््तिना पत््तिरेव च ॥ ३५७ ॥
एकेनैकश्च शस्त्रेण शस्त्रमस्त्रेण वाऽस्त्रकम् ।

हाथी पर सवार सैनिक-हाथीवालों से, घुड़सवार-घुड़सवारों से, रथ पर चढ़े हुये रथवालों से एवं पैदल सैनिक-पैदल सैनिकों से युद्ध करें और अकेला-अकेले से, शस्त्रवाला-शस्त्रवालों से एवं अस्त्रवाला सैनिक अस्त्रवालों से लड़े।

न च हन्यात् स्थलारूढं न क्लीबं न कृताञ्जलिम् ॥ ३५८ ॥
न मुक्तकेशमासीनं न तवास्मीतिवादिनम् ।
न सुप्तं न विसन्नाहं न नग्नं न निरायुधम् ॥ ३५६ ॥
न युध्यमानं पश्यन्तं युध्यमानं परेण च ।
पिबन्तं न च भुञ्जानमन्यकार्याकुलं न च ॥ ३६० ॥
न भीतं न परावृत्तं सतां धर्ममनुस्मरन् ।

युद्ध में प्रहार करने के अयोग्य सैनिकों के लक्षण—सज्जन पुरुषों के युद्धधर्म का ध्यान रखनेवाला सैनिक अपने से नीचे किसी जगह खड़े हुये को, एवं नपुंसक, हाथ जोड़े हुये, शिर के बाल बिखरे हुये, बैठे हुये 'मैं तुम्हारे अधीन हूँ' ऐसा कहते हुये, सोये हुये, लड़ाई के योग्य वेष नहीं धारण किये हुये, नग्न, शस्त्ररहित, नहीं लड़ते हुये, दूसरे के साथ होते हुये युद्ध को देखते हुये, जलपानादि करते हुये, भोजन करते हुये, युद्ध के अतिरिक्त अन्य कार्यों में व्यस्त हुये, डरे हुये एवं युद्ध से विमुख हुये, ऐसे सैनिकों के ऊपर प्रहार नहीं करे।