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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 420 of 526

Read in context
Page 420
३३४शुक्रनीतिः

अष्टाविंशत्यङ्गुलो यो मुखे नीचः प्रकीर्तितः।
वाजिनां मुखमानेन सर्वावयवकल्पना ॥ ४५ ॥

**नीच अश्व के लक्षण तथा अश्व के अवयवों की मान-कल्पना—**और जिसका मुख २८ अंगुल का होता है वह 'नीच' घोड़ा समझा जाता है। और घोड़ों के मुख के मान के द्वारा सम्पूर्ण अवयवों के मान की भी कल्पना की जाती है।

औच्चं तु मुखमानेन त्रिगुणं परिकीर्तितम् ।
शिरोमणि समारभ्य पुच्छमूलान्तमेव हि ॥ ४६ ॥
तृतीयांशाधिकं दैर्घ्यं मुखमानाच्चतुर्गुणम् ।
परिणाहस्तूदरस्य त्रिगुणस्त्र्यङ्गुलाधिकः ॥ ४७ ॥

**अश्व की ऊंचाई और लम्बाई का प्रमाण—**उक्त मुखमान से तिगुनी ऊंचाई कही हुई है। घोड़े की शिरोमणि भाग से लेकर पूंछ के मूल भाग तक की लम्बाई मुखमान से तृतीयांश अधिक चौगुनी होती है। और उदर का विस्तार ३ अंगुल अधिक तिगुना होता है।

साधारणमिदं मानमुच्यते विस्तरादथ ।
अष्टाविंशाङ्गुलमुखं पुरस्कृत्य यथा तथा ॥ ४८ ॥
शफोच्चं त्र्यङ्गुलं ज्ञेयं मणिबन्धोऽङ्गुलाधिकः ।

यह साधारण रूप से मान कहा गया, अब विस्तारपूर्वक कहा जा रहा है। यदि २८ अंगुल प्रमाण मुखवाला नीच संज्ञक अश्व हो तो उसके खुर की ऊंचाई तीन ३ अंगुल प्रमाण की होती है और मणिबन्ध अर्थात् खुर का ऊपरी भाग १ अंगुल अधिक अर्थात् ४ अंगुल प्रमाण का होता है।

चतुर्हस्ताङ्गुला जङ्घा त्र्यङ्गुलं जानु कीर्तितम् ॥ ४९ ॥
चतुर्दशाङ्गुलावूरू कूर्परान्तं स्मृतो बुधैः ।
अष्टत्रिंशाङ्गुलं ज्ञेयं स्कन्धान्तं कूर्परादितः ॥ ५० ॥

और जंघा ४ हस्त के अंगुल प्रमाण की, जानु ३ अंगुल प्रमाण का कहा कहा हुआ है। और कूर्पर के दूनी पर्यन्त दोनों ऊरु १४ अंगुल प्रमाण का पण्डितों ने कहा है। कूर्पर से लेकर स्कन्ध पर्यन्त ऊंचाई ३८ अंगुल की होती है।

प्रत्यगूरू मुखसमौ जङ्घोना पादमानतः ।
प्रोक्तोच्चता चाथ दैर्घ्यमुच्यते शास्त्रसङ्गतम् ॥ ५१ ॥

और पीछे के दोनों ऊरु मुख के समान अर्थात् २८ अंगुल प्रमाण के होते हैं। और पीछे की जंघा चौथाई मान से कम होती है। इस प्रकार से घोड़ों की ऊंचाई का वर्णन किया गया अब शास्त्र-संगत लम्बाई का वर्णन किया जा रहा है।