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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 416 of 526

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Page 416
३३०शुक्रनीतिः

करना सिखाकर तथा पौष्टिक भोजन खिलाकर बाहुयुद्ध के लिये सैनिकों के शारीरिक बल को बढ़ाना चाहिये ।

मृगयाभिस्तु व्याघ्राणां शस्त्रास्त्राभ्यासतः सदा ॥ १७॥
वर्धयेच्छूरसंयोगात् सम्यक् शौर्यबलं नृपः ।

शौर्यबल बढ़ाने के उपाय— और सदा व्याघ्रों का शिकार, शस्त्र तथा अस्त्रों को चलाने का अभ्यास एवं शूरवीरों की सङ्गति कराकर सैनिकों के 'शौर्यबल' को राजा बढ़ावे ।

सेनाबलं सुभृत्या तु तपोभ्यासैस्तथाऽस्त्रिकम् ॥ १८॥
वर्धयेच्छास्त्रचतुर-संयोगाद् धीबलं सदा ।

सेनाबल, आस्त्रिकबल व बुद्धिबल बढ़ाने के उपाय— सुन्दर वेतन देकर 'सेनाबल' तथा तपस्या और अभ्यास कराकर अर्थात् दिव्यास्त्रों का प्रयोग तपस्या द्वारा बाण चलाने के अभ्यास के द्वारा कराकर 'आस्त्रिकबल' एवं धर्म शास्त्र तथा राजनीति जानने में चतुर लोगों की सङ्गति कराकर 'बुद्धिबल' को सदा बढ़ाना चाहिये ।

सत्क्रियाभिश्चिरस्थायि नित्यं राज्यं भवेद् यथा ॥ १९॥
स्वगोत्रे तु तथा कुर्यात्तदायुर्बलमुच्यते ।
यावद्गोत्रे राज्यमस्ति तावदेव स जीवति ॥ २०॥

आयुर्बल के लक्षण— नित्य सत्कर्म करने के द्वारा जिस भांति से अपने वंश में राज्य चिरस्थायी हो उस भांति से राजा को करना चाहिये इसी को 'आयुर्बल' कहते हैं । क्योंकि जब तक उसके वंश में राज्य बना रहता है तब तक ही वह जीवित रहता है ।

चतुर्गुणं हि पादातमश्वतो धारयेत् सदा ।
पञ्चमांशॉस्तु वृषभानष्टांशांश्च क्रमेलकान् ॥ २१॥
चतुर्थांशान् गजानुष्ट्रान् गजाद्धांश्च रथान् सदा ।
रथात्तु द्विगुणं राजा बृहन्नालीकमेव च ॥ २२ ॥

सेना में पदाति आदियों की संख्या का नियम— घुड़सवार सैनिकों से चौगुनी पैदल सेना एवं घुड़सवार सेना के पञ्चमांश के बराबर बैल, अष्टमांश ऊंट और ऊंट का चतुर्थांश हाथी, हाथी का अर्द्धांश रथ, और रथ का द्विगुण बृहन्नालीक (तोप) इन सबों को राजा अपनी सेना के अन्तर्गत सदा रक्खे ।

पदातिबहुलं सैन्यं मध्याश्वं तु गजाल्यकम् ।
तथा वृषोष्ट्रसामान्यं रत्नेभागाधिकं नहि ॥ २३ ॥

राजा सेना में पैदल सिपाहियों को अधिक संख्या में, घोड़ों को मध्यसंख्या में और हाथियों को थोड़ी संख्या में रक्खे । तथा बैल एवं ऊंटों की संख्या साधारण रक्खे किन्तु हाथियों की संख्या अधिक न रक्खे ।