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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 372 of 526

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Page 372

२८६ | शुक्रनीतिः

कार्य में नियुक्त, दान करने में उद्यत, किसी व्रत का धारण करनेवाला, विषमस्थान में पड़ा हुआ ऐसे लोग मुकदमे की तारीख के समय पेश करने योग्य नहीं होते हैं अतः राजा इन्हें न बुलवाये।

नदीसन्तारकान्तार-दुर्द्देशोपप्लवादिषु ॥ १०५ ॥
असिद्धस्तं परासेधमुक्तामन्नापराध्नुयात् ।

नदी को पार करने की कठिनाई होने पर, दुर्गम जंगल, दुर्द्देश या किसी उपद्रव में पड़ जाने पर जो आने में असमर्थ हो जाने से मुकद्दमे की तारीख पर न आ सके तो राजा उसे अपराधी नहीं समझे।

कालं देशं च विज्ञाय कार्याणां च बलाबलम् ॥ १०६ ॥
अकल्यादीनपि शनैर्यानैराह्वानयेन्नृपः ।
ज्ञात्वाऽभियोगं येऽपि स्युर्वने प्रव्रजितादयः ॥ १०७ ॥
तानप्याह्वानयेद्राजा गुरुकार्येष्वकोपयन् ।

आने में असमर्थ लोगों को सवारी से बुलवाने का निर्देश— काल, देश और कार्य के बलाबल को समझ कर असमर्थ सज्जन पुरुषों को राजा सवारी से धीरे २ बुलवावे। और जो लोग संन्यास ग्रहण कर वन में रहते हैं उनके ऊपर अभियोग लगने पर उन्हें भी विशेष कार्य यदि हो तभी इस रीति से सम्मानपूर्वक बुलवाये कि वे कुपित न हों।

व्यवहारानभिज्ञेन ह्यन्यकार्याकुलेन च ॥ १०८ ॥
प्रत्यर्थिनाऽर्थिना तज्ज्ञः कार्यः प्रतिनिधिस्तदा ।

अर्थी-प्रत्यर्थी के अन्य कार्य में व्यस्त रहने पर प्रतिनिधि करने का निर्देश— व्यवहार (मुकदमा लड़ना) न जानता हो या किसी कार्य में व्यस्त हो ऐसा वादी या प्रतिवादी चाहे जो हो वह मुकद्दमे के जानकार किसी भी व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि बनावे।

अप्रगल्भजडोन्मत्त-वृद्धस्त्रीबालरोगिणाम् ॥ १०९ ॥
पूर्वोत्तरं वदेद् बन्धु-र्नियुक्तो वाऽथवा नरः ।
पिता माता सुहृद् बन्धु-र्भ्राता संबन्धिनोऽपि च ॥ ११० ॥
यदि कुर्युदुपस्थानं वादं तत्र प्रवर्त्तयेत् ।

अप्रगल्भ आदि के उत्तर पक्ष को बन्धु आदि को कहने का तथा पक्ष ठीक-ठीक कह सकने पर ही विवाद को प्रवृत्त करने का निर्देश— अप्रगल्भ (बातचीत करने में बेवकूफ), जड़, पागल, वृद्ध, स्त्री, बालक और रोगी इन लोगों के पूर्व पक्ष या उत्तर पक्ष को इनके बन्धु या नियुक्त कोई प्रतिनिधि यदि कह सकें अथवा इनके पिता, माता, मित्र, बन्धु, भाई या सम्बन्धी पूर्वपक्षादि को ठीक २ कह सकें तो मुकद्दमे की कार्यवाही प्रारम्भ कर देवें।