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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 344 of 526

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Page 344

२५८ | शुक्रनीतिः

प्रासादमध्यविस्तारः प्रतिमायाः समन्ततः ।
षड्गुणोऽष्टगुणो वापि पुरतो वा सुविस्तरः ॥ १३६ ॥

**प्रासाद के भीतरी विस्तार का विचार—**प्रासाद के भीतरी भाग का विस्तार चारो तरफ प्रतिमा से छगुना या आठगुना होना चाहिये और प्रतिमा के आगे की तरफ सब से अधिक विस्तार होना चाहिये ।

वाहनं मूर्तिसदृशं सार्धं वा द्विगुणं स्मृतम् ।
यत्र नोक्तं देवताया रूपं तत्र चतुर्भुजम् ॥ १३७ ॥
अभयं च वरं दद्याद्यत्र नोक्तं यदायुधम् ।
अधः करे तूर्ध्वकरे शङ्खं चक्रं तथाऽङ्कुशम् ॥ १३८ ॥
पाशं वा डमरुं शूलं कमलं कलशं स्रुवम् ।
लड्डुकं मातुलुङ्गं वा वीणां मालां च पुस्तकम् ॥ १३९ ॥

**प्रतिमा के वाहन, रूप तथा आयुध के स्थान का विचार—**देवता का वाहन देवमूर्ति के अनुरूप डेढ़गुना या दुगुना बड़ा होना चाहिये। जहां पर देवता का रूप (बाहु का उल्लेख) नहीं कहा हो वहां पर चतुर्भुज बनाना चाहिये । जहां पर देवता के आयुध (अस्त्र-शस्त्र) का उल्लेख न हो वहां पर नीचे के हाथों में क्रम से अभय तथा वर मुद्रा का अंकन करना चाहिये । और ऊपर हाथों में शङ्ख, चक्र, अंकुश, पाश, डमरु, शूल, कमल, कलश, स्रुवा, लड्डू, मातुलुङ्ग, वीणा, माला वा पुस्तक का अंकन करना चाहिये ।

मुखानां यत्र बाहुल्यं तत्र पङ्क्त्या निवेशनम् ।
तत् पृथग्-ग्रीवमुकुटं सुमुखं स्वक्षिकर्णयुक् ॥ १४० ॥

**प्रतिमा के अनेक मुख होने पर व्यवस्था का निर्देश—**जहां पर प्रतिमा में बहुत सा मुख बनाना हो वहां पर उन्हें एक पंक्ति में बनाना चाहिये । और उनकी ग्रीवा, मुकुट तथा मुख, आंख और कान को पृथक् २ सुन्दर रीति से बनाना चाहिये ।

भुजानां यत्र बाहुल्यं न तत्र स्कन्धभेदनम् ।

**अनेक भुजाओं की व्यवस्था—**जिस मूर्ति में बहुत भुजायें बनानी हों वहां स्कन्धों में भेद नहीं किया जाता है अर्थात् स्कन्ध दो ही बनाये जाते हैं किन्तु भुजायें दो से अधिक भी बनाई जाती है ।

कूर्परोर्ध्वं तु सूक्ष्माणि चिपिटानि दृढानि च ॥ १४१ ॥
भुजमूलानि कार्याणि पक्षमूलानि वै यथा ।

केहुनी के ऊपर भुजाओं के मूल भाग, दोनों पार्श्वों के मूल भाग के समान सूक्ष्म, चिपटे तथा दृढ़ बनाने चाहिये ।