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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 300 of 526

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Page 300

२१४ | शुक्रनीतिः

उनकी संख्या को परस्पर गुणा करके वर्ग निकाल ले अर्थात् यदि ४ है, तो ४, ही से गुणा करके १६ वर्ग हुआ, इसे चौथाई से हीन करने पर १२ हुआ पुनः १४ से गुणा करने पर १६८ हुआ, इसको २१ से भाग देने पर लब्धि ८ हुई, इससे मूल्य की कल्पना करे। उत्तम मुक्ता का मूल्य आधा सुवर्ण होता है, उसके बाद गुणानुसार मध्यम तथा अधम होने से उत्तरोत्तर कम होता जाता है।

मुक्ताया रक्तिकौघस्य प्रतिरक्तौ कला नव ।
कल्पयेत्पञ्चभागान् हि त्रिंशद्भिः प्राग्भजेच्च तान् ॥ ८२ ॥
लब्धं कलासु संयोज्य कलाः षोडशभिर्भजेत् ।
मूल्यं तज्ज्ञन्विधीतो योज्यं मुक्ताया वा यथागुणम् ॥ ८३ ॥

मोती की रत्तियों के वर्ग में प्रत्येक रत्ती को नौ ९ कला समझनी चाहिये। फिर उन रत्तियों को पचगुना करके ३० से भाग दे। और जो लब्धि हो उसे कलाओं में जोड़ दे। फिर १६ का भाग दे, जो लब्धि हो उससे मोती का मूल्य समझना चाहिये। अथवा गुणानुसार मोती का मूल्य निश्चित करना चाहिये।

रक्तं पीतं वर्तुलं चेन्मौक्तिकं चोत्तमं सितम् ।
अधमं चिपिटं शर्कराभमन्यत्तु मध्यमम् ॥ ८४ ॥

मोती के भेद और लक्षण—लाल, पीला और श्वेत रंग की गोल मोती उत्तम होती है। और जो चिपटी तथा शर्करा के समान होती है वह अधम और इससे अन्य मोती मध्यम कहलाती है।

रत्ने स्वभाविका दोषाः सन्ति धातुषु कृत्रिमाः ।
अतो धातून् सम्परीक्ष्य तन्मूल्यं कल्पयेद् बुधः ॥ ८५ ॥

रत्नों में स्वाभाविक (स्वयम्) दोष उत्पन्न होते हैं। किन्तु धातुओं में (सुवर्णादि में) मिलाने से कृत्रिम दोष होते हैं। अतः धातुओं की भलीभांति परीक्षा करके बुद्धिमान को उनके मूल्य की कल्पना करनी चाहिये।

सुवर्णं रजतं ताम्रं वङ्गं सीसं च रङ्गकम् ।
लोहं च धातवः सप्त ह्येषामन्ये तु संकराः ॥ ८६ ॥

सुवर्णादि सात धातुओं का निर्देश—सोना, चांदी, तांबा, वंग, सीसा, रांगा, लोहा ये ७ शुद्ध धातुयें हैं, इनसे अन्य धातुयें इन सबों के मेल से बनती हैं अतः वे संकर (मिलावटी) धातु कहलाती हैं।

यथापूर्वं तु श्रेष्ठं स्यात्स्वर्णं श्रेष्ठतरं मतम् ।
वङ्गताम्रभवं कांस्यं पित्तलं ताम्ररङ्गजम् ॥ ८७ ॥

सुवर्णादि ७ धातुओं के तरतम भाव—उक्त ७ धातुओं में अन्तिम लोह से