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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

by महर्षि वाल्मीकि

DevanagariHindipublished2,621 pages

Page 528 of 2621

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Page 528

वनमें श्रीरामचन्द्रजीके साथ निवास करें॥ ३५ ॥

‘राजकुमारी सीता मुख्य-मुख्य सेवकों तथा सवारियोंके साथ सब प्रकारके वस्त्रों और आवश्यक उपकरणोंसे सम्पन्न होकर वनकी यात्रा करें। तूने वर माँगते समय पहले सीताके वनवासकी कोई चर्चा नहीं की थी (अतः इन्हें वल्कल-वस्त्र नहीं पहनाया जा सकता)’॥

ब्राह्मणशिरोमणि अप्रतिम प्रभावशाली राजगुरु महर्षि वसिष्ठके ऐसा कहनेपर भी सीता अपने प्रियतम पतिके समान ही वेशभूषा धारण करनेकी इच्छा रखकर उस चीर-धारणसे विरत नहीं हुईं॥ ३७ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें सैंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३७॥