Skip to content
SarvaKosh
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

by गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर')

DevanagariHindipublished110 pages

Page 94 of 110

Read in context
Page 94

दो.: पवनतनय संकट-हरन महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (दोहा)—
पवनतनय संकट-हरन मंगल-मूरति-रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर-भूप॥
शब्दार्थ—पवनतनय ▸ पवनके पुत्र। सुर-भूप ▸ देवताओंके राजा।
अर्थ—हे पवनके पुत्र! समस्त संकटोंको हरनेवाले मङ्गलमूर्ति-रूप!!
समस्त देवताओंके अधिष्ठान-स्वरूप श्रीहनुमान्जी महाराज!!! आप श्रीराम,
श्रीलक्ष्मण, एवं माँ मैथिलीके साथ हमारे हृदयमें निवास करें।
व्याख्या—चार विशेषण देकर श्रीहनुमान्जीको ही मन, बुद्धि, अहंकार,
एवं चित्तको शुद्ध करनेमें सहायक सिद्ध करते हैं और पश्चात् राम, लक्ष्मण,
एवं सीताजीके सहित हृदयमें विश्राम करनेकी प्रार्थना करके सर्वतोभावेन
श्रीमन्मारुतिके ही श्रीचरणकमलकी शरणागतिको ही परम पुरुषार्थ बताकर
ग्रन्थको विश्राम दे रहे हैं।
॥ उपसंहारः ॥
सुमिरि राम-सिय-चरन-कमल गुरु-पद-रज शिर धरि।
चऊद्वार उत्कल-थल मारुतसुतहि ध्यान करि॥
संबत नभ-फल-ख-दृग सुमाधव शिव शनिवारा।
शुक्ल दूज हनुमान-चलीसा मति अनुसारा॥
जुगुति-शास्त्र-सिद्धान्तमय वैष्णव-रीति-भगति-भरी।
नाम महावीरी ललित लघु व्याख्या गिरिधर करी॥
॥ श्रीहनुमते नमः ॥
८०