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शिव सूत्र (क्षेमराज विमर्शिनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Shiva Sutras with Kshemaraja Vimarshini & Hindi Translation

by महर्षि वसुगुप्त / आचार्य क्षेमराज

Source: काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished108 pages
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अन्य कृतियाँ:-
स्पन्दकारिका
नीलकंठ गुरुटु
शिवशक्तिसामरस्य सदाशिवतत्त्व से लेकर पृथिवीतत्त्व तक सारे जड़चेतनात्मक विश्व का आधारभूत
एवं यथार्थ स्वरूप है। स्पन्दशास्त्र के पारिभाषिक शब्दों में इसी को चिन्मात्ररूप आत्मसत्ता भी
कहते हैं। इस सामरस्य में शिव प्रकाश है और शक्ति उसका विमर्श है। वास्तव में यह नीरक्षीरात्मक
सामरस्य है। विमर्श प्रकाश की स्पन्दना है और स्पन्दना होने के कारण प्रकाश का प्राण है।
फलतः प्रकाश-रूप शिव की निजी अभिन्न अहंविमर्शरूपा शक्ति ही स्पन्द है।
संस्कृत भाषा से अपरिचित किन्तु सत्शास्त्रों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए मूल सूत्रों और
वृत्ति का हिन्दी अनुवाद इस ग्रन्थ में प्रस्तुत किया है।
परात्रिंशिका
नीलकंठ गुरुटु
काश्मीर शैवदर्शन में परात्रिंशिका का कितना महत्त्वपूर्ण स्थान है, यह इसी से ज्ञात हो जाता है कि
सोमानन्द, भवभूति, कल्याण, अभिनवगुप्त, लक्ष्मीराम तथा लासक जैसे मूर्धन्य विद्वानों ने इसकी
व्याख्याएँ की हैं। इन सबमें अभिनवगुप्त कृत विवरण सर्वाधिक विस्तृत और ग्रन्थ का रहस्य स्पष्ट
करने के लिए अत्युपयुक्त माना गया है।
त्रिकदर्शन के मर्मज्ञ विद्वान श्री नीलकण्ठ गुरुटु ने इस विवरण की हिन्दी में सर्वप्रथम व्याख्या
की है। यह अनुवाद मात्र नहीं, विस्तृत व्याख्या है, जिसमें ग्रन्थ की सारी ग्रन्थियाँ खोलकर रख दी
गई हैं; जहाँ कहीं गूढ़ता रह गई थी, उसे टिप्पणियों में स्पष्ट कर दिया गया है। मूल-पाठ में
विभिन्न टीकाओं में जो विसंगतियाँ थीं, उन्हें भी कई टीकाओं और पाण्डुलिपियों के आधार पर
शुद्ध कर दिया गया है।
प्रत्यभिज्ञाहृदयम्
जयदेव सिंह
विश्व के कदाचित् प्राचीनतम धर्म-शैव धर्म की मुख्य विधाओं में से एक-कश्मीर का अद्वैत
शैव दर्शन-प्रस्तुत ग्रन्थ का विषय है जिसमें शैव सिद्धान्तों की विशद् व्याख्या की गई है। इसमें
क्षेमराज ने समस्त प्रत्यभिज्ञादर्शन का सार प्रस्तुत किया है।
प्रत्यभिज्ञादर्शन समझने के लिए प्रत्यभिज्ञाहृदयम् ठीक उसी प्रकार उपयोगी है जैसे वेदान्तदर्शन
समझने के लिए 'वेदान्तसार'। उपोद्घात, पारिभाषिक व दुरूह शब्दों पर टिप्पणियाँ और प्रतिपादित
विषयों का संक्षिप्त सार पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ हैं।
मोतीलाल बनारसीदास
दिल्ली • मुम्बई • चेन्नई • कोलकाता
बंगलौर • वाराणसी • पुणे • पटना
E-mail: [email protected]
Website: www.mlbd.com
मूल्यः रु० ५० कोड : 27694
ISBN 81-208-2769-4
9788120827691