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सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य

DevanagariHindipublished415 pages

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श्री चक्र निर्माण की विधि पृ. १०३, श्लो. १२ पृ. १११, भगवती
का सौन्दर्य कल्पनातीत है पृ. ११०, श्लो १३ पृ. ११३, काय
सम्पत् सिद्धि, श्लो. १४ पृ. ११५, तत्त्वों की किरणें ११५,
किरणों का तत्त्वों से सम्बन्ध १२७, किरणों का वर्णमाला से सम्बन्ध
१२८, किरणों की अधिष्ठातृ शक्तियां १३१, श्लो. १५ पृ. १२५,
वाक् सिद्धि, श्लो. १६ पृ. १२७, श्लो. १७ पृ. १२९, श्लो. १८
पृ. १३०. मधुमती भूमिका की सिद्धि श्लो १९ पृ. १३२, काम
कला का ध्यान, श्लो. २० शक्तिपात करने की सिद्धि, पृ. १३५,
श्लो. २१ पृ. १३७. चक्रों और सहस्रार का सविस्तार वर्णन,
पृ. १३९. चन्द्र सूर्य पृ. १४४ तत्त्वों और चक्रों के अधिदेवों की
कलाओं के नाम १४७ आत्म के ऊपर ९ स्तर १४९, श्लो. २२
पृ. १५३, अहं ब्रह्मास्मि ज्ञान का उदय १५३, श्लो. २३ अर्ध-
नारीश्वर सदा