सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
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Read in context“सौन्दर्य लहरी” का “सौन्दर्य-माधुर्य”
“सौन्दर्य लहरी” श्री भगवत्पाद आद्य शङ्कराचार्य द्वारा
रचित एक प्रासादिक स्तोत्र है जिसके पाठ से अनेक साधकों का
महान कल्याण हुआ है। श्री जगजननी आदिशक्ति महात्रिपुर सुन्दरी
के प्रकाश से यह सकल चर अचर प्रकाशित है। माँ की इस स्तुति
से साधक शिशुओं के हृदय में अपार शान्ति एवं अपूर्व तेज और
ओज का दिव्य समावेश होता है—यह अनेकों का अनुभव है।
उसी महान मंगलमय स्तोत्र की श्रीमत्स्वामीजी श्री विष्णुतीर्थजी
महाराज ने योगपरक अपूर्व व्याख्या की है जो ज्ञान-विज्ञान एवं
व्यक्तिगत यौगिक अनुभूतियों से समवेत होने के कारण योगसाधकों
के लिए अनमोल बन गयी है। वेद, उपनिषद, गीता, सप्तशति
आदि ग्रंथों के प्रचुर उद्धरण एवं प्रमाण से ग्रंथ का एक-एक पृष्ठ
परिपुष्ट है। पूर्वानुक्रमणिका के कारण यह अत्यन्त गहन एवं रहस्यपूर्ण
विषय बहुत ही सरलता से संग्राह्य हो गया है। क्लिष्ट शब्दों के अर्थ,
भावार्थ एवं संक्षिप्त टिप्पणी तथा विषय-विवेचन के विवरण से संपूर्ण
ग्रंथ अपने आन्तरिक सौन्दर्य-माधुर्य के साथ आस्वाद्य हो गया है।
लेखक 'अनुभवी' व्यक्ति मालूम होते हैं, साधना के गुह्य पथ का
आपको अनुभव है, वे उसके रहस्य और मर्म को भली भाँति जानते-
समझते हैं और समझाने की भाषा इतनी प्राञ्जल, मधुर एवं मोहक है