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सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य

DevanagariHindipublished415 pages

Page 167 of 415

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Page 167

सौंदर्य लहरी १२१
किरणों की अधिष्ठातृ शक्तियां
अधिष्ठातृ शक्तियों के नाम शिव शक्ति के जोडे से नीचे
दिये जाते हैं।
पृथिवीः— १. उड्डीश्वर, उड्डीश्वरी, २. जलेश्वर, जलेश्वरी,
३. पूर्णेश्वर, पूर्णेधरी, ४. कामेश्वर, कामेश्वरी, ५. श्रीकंठ, गगना,
६. अनन्त स्वरसा, ७. शंकर, मति, ८. पिंगल, पाताल देवी,
९. नारदारव्य, नादा, १०. आनन्द, डाकिनी, ११. आलभ्य, शाकिनी,
१२. महानन्द, लाकिनी, १३. योग्य, काकिनी, १४. अतीत, साकिनी
१५. पाद, हाकिनी, १६. आधारेश, रक्ता, १७. चक्रीश, चंडा,
१८. करंगीश, कराला, १९. मदधीश, महोच्छुष्मा, २०. अनादि
विमल, मातंगी, २१. सर्वज्ञ विमल, पुलिन्दा, २२. योग विमल,
शंबरी, २३. सिद्ध विमल, वाचापरा, २४. समय विमल, कुलालिका,
२५. मित्रेश, कुब्जा, २६. उड्डीश, लध्वा, २७. षष्ठीश, कुलेश्वरी,
२८. चर्याधीश, अजा।
जलदेवता— १. सद्योजात, माया, २. वाम देव, श्री ३. अघोर,
पद्मा, ४. तत्पुरुष, अंबिका, ५. अनन्त, निवृत्ति, ६. अनाथ, प्रतिष्ठा,
७. अनाश्रित, विद्या, ८. अचिन्त्य, शान्ता, ९. शशिशेखर, उमा,
१० तीव्र, गंगा, ११. मणिवाह, सरस्वती, १२. अंबुवाह, कमला,
१३ तेजोधीश, पार्वती, १४ विद्यावागीश्वर, चित्रा, १५. चतुर्विधेश्वर
सुकमला, १६. उमांगंगेश्वर, मानमथा, १७. कृष्णेश्वर, श्रिया,
१८. श्रीकंठ, लया, १९. अनन्त, सती, २०. शंकर, रत्नमेखला,
२१. पिंगल, यशोवती, २२. सादारव्य, हंसानन्दा, २३. परि-