सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
by महर्षि कपिल
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in context( ४ ) हिन्दी सांख्य दर्शन
( ग ) आप्तश्रुति ( आप्तवाक्य ) या प्रामाणिक पुरुष
का वाक्य शब्द प्रमाण होता है ॥ ५ ॥
प्रमाणों का विषय भेद
सामान्यतस्तुदृष्टात् अतीन्द्रियाणां प्रतीतिरनुमानात्
तस्मादपिचासिद्धं परोक्षमाप्तागमात्सिद्धम् ॥६॥
( क ) प्रत्यक्ष प्रमाण ( इन्द्रिय ) का विषय घट (घड़ा)
पट ( वस्त्र ) एवम् पृथिवी आदि है ।
( ख ) अनुमान प्रमाण से अतीन्द्रिय या प्रत्यक्ष के
अविषय ( पर्वतादि देशस्थ अग्नि आदि ) पदार्थों की प्रतीति
होती है ।
( ग ) और उस अनुमान प्रमाण से भी असिद्ध परोक्ष
( महत् तत्व आदि या स्वर्ग अदृष्ट आदि ) पदार्थों की सिद्धि
शब्द प्रमाण से होती है ॥६॥
विद्यमान विषय में भी प्रत्यक्ष प्रमाण की
अप्रवृत्ति के कारण ।
अतिदूरात्सामीप्यादिन्द्रियघातान्मनोऽनवस्थानात्
सौक्ष्म्याद्व्यवधानादभिभवात्समानाभिहाराच्च ७
अति दूर होने से विद्यमान वस्तु भी प्रतीत नहीं होती
जैसे आकाश में उड़ता हुआ पक्षी अति दूर हो जाने पर रहता
हुआ भी नहीं दिखाई देता । ( १ ) अत्यन्त समीप होने से
भी वस्तु का प्रत्यक्ष नहीं होता । जैसे नेत्र का अञ्जन । ( २ )
इन्द्रिय का घात हो जाने से प्रत्यक्ष नहीं होता । जैसे अन्धता
( आंधेपन ) बधिरता ( बहरेपन ) से दर्शन श्रवण नहीं होता
( ३ ) मन के अनवस्थान या अन्य विषय में लग जाने से