Skip to content
SarvaKosh
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 926 of 1855

Read in context
Page 926

(११)
आ क्षोदो महि वृतं नदीनां परिष्ठितमसृज ऊर्मिमपाम्.
तासामनु प्रवत इन्द्र पन्थां प्रार्दयो नीचीरपसः समुद्रम्.. (१२)
हे इंद्र! तुमने वृत्र द्वारा रोकी हुई सब ओर स्थित नदियों के जल को बंधनमुक्त किया था
एवं जलसमूह की उत्पत्ति की थी. तुमने नदियों के मार्ग को नीचा बनाया है तथा उनके जल
को सागर में पहुंचाया है. (१२)
एवा ता विश्वा चकृवांसमिन्द्रं महामुग्रमजुर्यं सहोदाम्.
सुवीरं त्वा स्वायुधं सुवज्रमा ब्रह्म नव्यमवसे ववृत्यात्.. (१३)
हमारी नवीन स्तुतियां इस प्रकार सभी काम करने वाले, महान्, उग्र, नित्ययुवा,
शक्तिदाता, शोभन वीरों वाले, शोभन वज्रधारी, उत्तम आयुधों के स्वामी इंद्र को रक्षा के लिए
प्रेरित करें. (१३)
स नो वाजाय श्रवस इषे च राये धेहि द्युमत इन्द्र विप्रान्.
भरद्वाजे नृवत इन्द्र सूरीन्दिवि च स्मैधि पार्ये न इन्द्र.. (१४)
हे इंद्र! तुम शक्तिशाली एवं बुद्धिमान् हम लोगों को बल, शक्ति, अन्न एवं धन प्रदान
करो. हम भरद्वाजगोत्रीय ऋषियों को सेवकों तथा स्तुति करने वाले पुत्र-पौत्रों से युक्त करो
एवं भविष्य में हमारी रक्षा करो. (१४)
अया वाजं देवहितं सनेम मदेम शतहिमाः सुवीराः.. (१५)
इस स्तुति द्वारा हम इंद्र द्वारा दिया हुआ अन्न प्राप्त करें एवं शोभन संतान वाले होकर
सौ वर्ष तक प्रसन्न हों. (१५)
सूक्त—१८ देवता—इंद्र
तमु ष्टुहि यो अभिभूत्योजा वन्वन्नवातः पुरुहूत इन्द्रः.
अषाळ्हमुग्रं सहमानमाभिर्गीर्भिर्वर्ध वृषभं चर्षणीनाम्.. (१)
हे भरद्वाज ऋषि! उस इंद्र की स्तुति करो जो शत्रुओं को पराजित करने वाले, तेज से
युक्त, शत्रुहिंसक, अपराजित एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए हैं. तुम इन स्तुतिवचनों द्वारा
अपराजित, ओजस्वी, शत्रुनाशक एवं प्रजाओं की इच्छा पूर्ण करने वाले इंद्र को बढ़ाओ. (१)
स युध्मः सत्वा खजकृत्समद्वा तुविम्रक्षो नदनुमाँ ऋजीषी.
बृहद्रेणुश्च्यवनो मानुषीणामेकः कृष्टीनामभवत्सहावा.. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*