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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 901 of 1855

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Page 901

विश्वायुर्यो अमृतो मर्त्येषूद्भूदतिथिर्जातवेदाः.. (२)
दिन में प्रकाशकर्त्ता, सूर्य के समान तेजस्वी, जानने योग्य, सबके जीवन हेतु,
मरणरहित, सदा चलने वाले, सब प्राणियों के ज्ञाता एवं यजमानों में प्रातःकाल जागने वाले
अग्नि हमें वंदनीय अन्न दें. (२)
द्यावो न यस्य पनयन्त्यभ्वं भासांसि वस्ते सूर्यो न शुक्रः.
वि य इनोत्पजरः पावकोऽश्रस्य चिच्छिथ्रत्पूर्व्याणि.. (३)
स्तोता जिस अग्नि के महान् कर्म की स्तुति करते हैं, वे अग्नि सूर्य के समान उज्ज्वल हैं
एवं अपने तेज में छिपे रहते हैं. युवा एवं पवित्रकर्त्ता अग्नि अपने प्रकाश से सबको ढकते हैं
एवं राक्षसों तथा उनके नगरों को समाप्त करते हैं. (३)
वह्ना हि सूनो अस्यद्मसद्वा चक्रे अग्निर्ज॑नुषाज्मान्नम्.
स त्वं न ऊर्जसन ऊर्जं धा राजेव जेरवृके क्षेष्यन्तः.. (४)
हे बलपुत्र अग्नि! तुम वंदनीय हो. अग्नि हव्यों पर बैठकर स्वभाव से यजमानों को घर
एवं अन्न देते हैं. हे अन्नदाता अग्नि! तुम हमें अन्न दो, राजा के समान हमारे शत्रुओं को जीतो
एवं हमारी बाधारहित यज्ञशाला में विश्राम करो. (४)
नितिक्ति यो वारणमन्नमत्ति वायुर्न राष्ट्रयत्येत्यक्तून्.
तुर्याम यस्त आदिशामरातीरत्यो न हुतः पततः परिह्रुत्.. (५)
अग्नि अपने अंधकारनाशक तेज को तीखा बनाते हैं, हव्य को खाते हैं, वायु के समान
सब पर शासन करते हैं एवं रात का अंधेरा मिटाते हैं. हे अग्नि! हम तुम्हारी कृपा से उसे
जीतें, जो तुम्हें हव्य नहीं देता. हम पर आक्रमण करने वाले शत्रुओं के पास तुम अश्व के
समान जाकर उन्हें समाप्त करो. (५)
आ सूर्यो न भानुमद्भिरर्कैरग्ने ततन्थ रोदसी वि भासा.
चित्रो नयत्परि तमांस्यक्तः शोचिषा पत्मन्नौशिजो न दीयन्.. (६)
हे अग्नि! तुम सूर्यदेव के समान प्रकाशपूर्ण एवं अर्चनीय किरणों द्वारा धरती-आकाश
को भर देते हो. मार्ग में चलने वाला सूर्य जिस प्रकार अंधकार का नाश करता है, उसी प्रकार
अग्नि अंधकार को मिटाते हैं. (६)
त्वां हि मन्द्रतममर्कशोकैर्ववृमहे महि नः श्रोष्यग्ने.
इन्द्रं न त्वा शवसा देवता वायुं पृणन्ति राधसा नृतमाः.. (७)
हे परम स्तुति योग्य एवं पूज्यदीप्ति से युक्त अग्नि! तुम हमारी विशाल स्तुति सुनो!
स्तुति करने में कुशल ऋत्विज् इंद्र के समान शक्तिसंपन्न एवं गतिशील तुम्हें हव्य द्वारा प्रसन्न
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