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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 894 of 1855

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Page 894

अन्तस्वामी मरुतो! तुम्हारा शक्तिशाली, जल बरसाने वाला, तेजस्वी, गतिशील, बढ़ा हुआ एवं
शत्रुओं को पराजित करने वाला शब्द एवयामरुत् को कंपित न करे. (५)
अपारो वो महिमा वृद्धशवसस्त्वेषां शवोऽवत्वेवयामरुत्.
स्थातारो हि प्रसितौ संदृशि स्थन ते न उरुष्यता निदः शुशुक्वांसो नाग्नयः.. (६)
हे अपार महिमा वाले एवं अतिशय शक्तिशाली मरुतो! तुम्हारा बल एवयामरुत् की रक्षा
करे. नियमबद्ध यज्ञ का ज्ञान कराने में तुम्हीं समर्थ हो एवं अग्नि के समान प्रज्वलित हो. तुम
शत्रुओं से हमारी रक्षा करो. (६)
ते रुद्रासः सुमखा अग्नयो यथा तुविद्युम्ना अवन्त्वेवयामरुत्.
दीर्घं पृथु पप्रथे सद्म पार्थिवं येषामज्मेष्वा महः शर्धांस्यद्भुतैनसाम्.. (७)
वे रुद्रपुत्र एवं अग्नि के समान शोभन यज्ञों वाले मरुत् एवयामरुत् की रक्षा करें, जिनके
कारण अंतरिक्षरूपी दीर्घ एवं विस्तृत गृह प्रसिद्ध हुआ है एवं जिन पापरहित मरुतों की गति
में महान् बल है. (७)
अद्वेषो नो मरुतो गातुमेतन श्रोता हवं जरितुरेवयामरुत्.
विष्णोर्महः समन्यवो युयोतन स्मद्रथ्यो३ न दंसनाप द्वेषांसि सनुतः.. (८)
हे द्वेषरहित मरुतो! तुम स्तोता एवं एवयामरुत् के गतिशील स्तोत्र को सुनने हेतु आओ
और उसे सुनो. हे विष्णु के साथ यज्ञभाग पाने वाले मरुतो! योद्धा जिस प्रकार शत्रुओं को
भगाता है, उसी प्रकार तुम हमारे मन में छिपे पापों को दूर करो. (८)
गन्ता नो यज्ञं यज्ञियाः सुशमि श्रोता हवमरक्ष एवयामरुत्.
ज्येष्ठासो न पर्वतासो व्योमनि यूयं तस्य प्रचेतसः स्यात दुर्धर्तवो निदः.. (९)
हे यज्ञपात्र मरुतो! तुम हमारे यज्ञ को पूर्ण करने हेतु यहां आओ. हे विघ्नरहित मरुतो!
तुम एवयामरुत् की पुकार सुनो. हे उत्तम धन संपन्न मरुतो! तुम अत्यंत विशाल पर्वत के
समान अंतरिक्ष में रहकर निंदकों को वश में करो. (९)
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