ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 838 of 1855
Read in contextउद्ना न नावमनयन्त धीरा आशृण्वतीरापो अर्वागतिष्ठन्.. (१०)
सूर्य दीप्तिशाली जल पर आरूढ़ होते हैं. सूर्य जब अपने रथ में सुंदर पीठ वाले घोड़ों
को जोड़ते हैं, तब धीर यजमान उन्हें जल पर चलने वाली नाव के समान ले आते हैं एवं सूर्य
की आज्ञा मानने वाली जलराशि झुक जाती है. (१०)
धियं वो अप्सु दधिषे स्वर्षा ययातरन्दश मासो नवग्वा:.
अया धिया स्याम देवगोपा अया धिया तुतुर्यामात्यंह:.. (११)
हे देवो! हम तुम्हारी सब कुछ देने वाली स्तुति को जलप्राप्ति निमित्त बोल रहे हैं. नवग्व
यज्ञ करने वाले अत्रिगोत्रीय ऋषियों ने इन्हीं के सहारे दस महीने बिताए थे. इन्हीं स्तुतियों के
कारण हम देवों द्वारा रक्षित हों एवं पापों को लांघ सकें. (११)
सूक्त—४६ देवता—विश्वेदेव आदि
हयो न विद्वाँ अयुजि स्वयं धुरि तां वहामि प्रतरणीमवस्युवम्.
नास्या वश्मि विमुचं नावृतं पुनर्विद्वान्पथ: पुरएत ऋजु नेषति.. (१)
सब कुछ जानने वाले प्रतिक्षत्र ऋषि ने यज्ञ में अपने आपको इस तरह लगा दिया है,
जैसे घोड़ा गाड़ी में जुत जाता है. हम अध्वर्यु एवं होता भी उस उद्धार करने वाले एवं
रक्षाकारक कार्य का बोझा ढोते हैं. हम इससे छूटना नहीं चाहते और न इसे बार-बार ढोना
चाहते हैं. मार्ग को जानने वाले देव आगे चलते हुए सरलतापूर्वक लोगों को ले चलें. (१)
अग्न इन्द्र वरुण मित्र देवा: शर्ध: प्र यन्त मारुतोत विष्णो.
उभा नासत्या रुद्रो अध ग्ना: पूषा भग: सरस्वती जुषन्त.. (२)
हे इंद्र, अग्नि, वरुण एवं मित्र देव! हमें बल दो. मरुद्गण एवं विष्णु भी हमें बल दें. दोनों
अश्विनीकुमार, रुद्र, समस्त देवों की पत्नियां, पूषा, भग एवं सरस्वती हमारी स्तुति को
स्वीकार करें. (२)
इन्द्राग्नी मित्रावरुणादितिं स्व: पृथिवीं द्यां मरुतः पर्वताँ अप:.
हुवे विष्णुं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं भगं नु शंसं सवितारमूतये.. (३)
हम रक्षा के निमित्त इंद्र, अग्नि, मित्र, वरुण, अदिति, धरती, आकाश, मरुद्गण, पर्वत,
जल, विष्णु, पूषा, ब्रह्मणस्पति एवं भग को बुलाते हैं. (३)
उत नो विष्णुरुत वातो अस्रिधो द्रविणोदा उत सोमो मयस्करत्.
उत ऋभव उत राये नो अश्विनोत त्वष्टोत विभ्वानु मंसते.. (४)
विष्णु अथवा अहिंसक वायु अथवा धन देने वाले सोम हमें सुख दें. ऋभुगण,