Skip to content
SarvaKosh
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1838 of 1855

Read in context
Page 1838

है. उसकी पूजा करके हम यह अमंगल दूर करते हैं. हमारे दासदासियों एवं गो, अश्व आदि
का कल्याण हो. (१)
शिवः कपोत इषितो नो अस्त्वनागा देवाः शकुनो गृहेषु.
अग्निर्हि विप्रो जुषतां हविर्नः परि हेतिः पक्षिणी नो वृणक्तु.. (२)
हे देवो! हमारे घरों में जो कबूतर भेजा गया है, वह हमारे लिए शुभ हो एवं कोई
अमंगल न करे. विद्वान् अग्नि हमारा हव्य ग्रहण करें. यह पंखों वाला आयुध हमें छोड़ जावे.
(२)
हेतिः पक्षिणी न दभात्यस्मानाष्ट्र्यां पदं कृणुते अग्निधाने.
शं नो गोभ्यश्च पुरुषेभ्यश्चास्तु मा नो हिंसीदिह देवाः कपोतः.. (३)
यह कपोतरूपिणी पंखों वाली तलवार हमें न मारे. यह विस्तृत अग्निस्थापना वाले
स्थान पर बैठे. हमारे मानवों और गायों का कल्याण हो तथा यह कपोतदेव हमारी हिंसा न
करें. (३)
यदुलूको वदति मोघमेतद्यत्कपोतः पदमग्नौ कृणोति.
यस्य दूतः प्रहित एष एतत्तस्मै यमाय नमो अस्तु मृत्यवे.. (४)
उल्लू जो कहता है, वह व्यर्थ हो. यह कबूतर अग्नि के स्थान में बैठता है. यह जिसका
दूत बनकर आया है, उस मृत्यु देव यम को नमस्कार है. (४)
ऋचा कपोतं नुदत प्रणोदमिषं मदन्तः परि गां नयध्वम्.
संयोपयन्तो दुरितानि विश्वा हित्वा न ऊर्जं प्र पतात्पतिष्ठः.. (५)
हे देवो! मंत्रों द्वारा इस भगाने योग्य कबूतर को भगाओ. आनंद के साथ गाय को घास
की ओर ले चलो. अत्यंत शीघ्र उड़ने वाला यह कबूतर हमारे सभी पापों को अदृश्य करता
हुआ हमारा अन्न छोड़कर उड़ जावे. (५)
सूक्त—१६६ देवता—शत्रुनाश
ऋषभं मा समानानां सपत्नानां विषासहिम्.
हन्तारं शत्रूणां कृधि विराजं गोपतिं गवाम्.. (१)
हे इंद्र! मुझे समान व्यक्तियों का प्रमुख, शत्रुओं का पराजयकर्त्ता, विरोधियों का नाशक
एवं गायों का स्वामी तथा विशेषरूप से सुशोभित बनाओ. (१)
अहमस्मि सपत्नहेन्द्र इवारिष्टो अक्षतः.
अधः सपत्ना मे पदोरिमो सर्वे अभिष्ठिताः.. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*