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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1712 of 1855

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Page 1712

आशसनं विशसनमथो अधिविकर्तनम्.
सूर्यायाः पश्य रूपाणि तानि ब्रह्मा तु शुन्धति.. (३५)
सूर्या का रूप देखो. इसके वस्त्र के लपेटने वाले भाग का रंग अलग है और सिर पर
ओढ़ने वाला भाग अलग रंग का है. यह तीन जगह से फटा हुआ है. ब्रह्मा ही इस वस्त्र को
शुद्ध कर सकते हैं. (३५)
गृभ्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः.
भगो अर्यमा सविता पुरन्धिर्महां त्वादुर्गार्हपत्याय देवाः.. (३६)
मैं तुम्हारा हाथ सौभाग्य के लिए पकड़ रहा हूं. मुझ पति के साथ तुम वृद्ध शरीर वाली
बनो. भग, अर्यमा, सविता एवं पूषा आदि देवों ने तुम्हें इसलिए दिया है कि मैं तुम्हारे साथ
गृहस्थ धर्म का पालन कर सकूं. (३६)
तां पूषञ्छिवतमामेरयस्व यस्यां बीजं मनुष्या३ वपन्ति.
या न ऊरू उशती विश्रयाते यस्यामुशन्तः प्रहराम शेपम्.. (३७)
हे पूषा! मनुष्य जिस नारी के गर्भ में बीज बोते हैं, उसे तुम अतिशय कल्याणी बनाकर
भेजो. यह हमारी जंघाओं की कामना करती हुई अपनी जंघाओं को फैलावे एवं हम कामना
करते हुए इसकी विस्तृत जंघाओं में अपनी पुरुषेंद्रिय का प्रवेश करावें. (३७)
तुभ्यमग्रे पर्यवहन्सूर्यां वहतुना सह. पुनः पतिभ्यो जायां दा अग्ने प्रजया सह.. (३८)
हे अग्नि! सूर्या को चादर ओढ़ाकर सबसे पहले तुम्हारे ही समीप लाया जाता है. तुम
पत्नी को संतानसहित पति के लिए देते हो. (३८)
पुनः पत्नीमग्निरदादायुषा सह वर्चसा. दीर्घायुरस्या यः पतिर्जीवाति शरदः शतम्..
(३९)
अग्नि ने आयु और तेज के साथ पत्नी पुनः पति को प्रदान की. इसका पति दीर्घ
अवस्था वाला बनकर सौ बरस जिए. (३९)
सोमः प्रथमो विविदे गन्धर्वो विविद उत्तरः.
तृतीयो अग्निष्टे पतिस्तुरीयस्ते मनुष्यजाः.. (४०)
हे कन्या! सबसे पहले सोम ने तुम्हें पत्नीरूप में प्राप्त किया. इसके बाद तुम्हें गंधर्व ने
प्राप्त किया. तेरा तीसरा पति अग्नि और चौथा मानव है. (४०)
सोमो ददद् गन्धर्वाय गन्धर्वो दददग्नये.
रयिं च पुत्राँश्चादादग्निर्मह्यमथो इमाम्.. (४१)
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