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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1681 of 1855

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Page 1681

किरणों का संयोग करता है एवं पतिपत्नी को परस्पर मिलाता है, उसी प्रकार बृहस्पति ने
गायों को उनके स्वामियों से मिलाया. हे बृहस्पति! गायों को युद्ध में दौड़ने वाले घोड़ों के
समान दौड़ाओ. (२)
साध्वर्या अतिथिनिरीषिराः स्पार्हाः सुवर्णा अनवद्यरूपाः.
बृहस्पतिः पर्वतेभ्यो वितुर्या निर्गा ऊपे यवमिव स्थिविभ्यः.. (३)
अन्न की कुठिया से जिस प्रकार जौ बाहर निकाले जाते हैं, उसी प्रकार बृहस्पति ने
कल्याणकारी दूध देने वाली, नित्य गमनशील, स्पृहणीय, शोभन वर्ण वाली और
प्रशंसनीयरूप से युक्त गायों को पर्वत से बाहर निकाला. (३)
आपुषायन्मधुन ऋतस्य योनिमवक्षिपन्नर्क उल्कामिव द्योः.
बृहस्पतिरुद्धरन्नश्मनो गा भूम्या उदनेव वि त्वचं बिभेद.. (४)
आदरणीय बृहस्पति ने धरती को जल से सींचते हुए एवं मेघ को वर्षा के निमित्त
बिखेरते हुए पणियों द्वारा छीनी हुई गायों को पर्वत से निकालकर धरातल को उनके खुरों से
इस प्रकार छिन्नभिन्न कराया, जिस प्रकार सूर्य आकाश से अपनी किरणें गिराते हैं. (४)
अप ज्योतिषा तमो अन्तरिक्षादुदनः शीपालमिव वात आजत्.
बृहस्पतिरनुमृश्या वलस्याभ्रमिव वात आ चक्र आ गाः.. (५)
वायु जिस प्रकार जल से काई हटा देता है, उसी प्रकार बृहस्पति ने सूर्य के प्रकाश द्वारा
पर्वत का अंधकार समाप्त किया. हवा जिस तरह बादलों को हटाती है, उसी प्रकार बृहस्पति
ने विचार करके बल नामक राक्षस के स्थान में छिपी हुई गायों को बाहर निकाला. (५)
यदा वलस्य पीयतो जसुं भेद बृहस्पतिरग्नितपोभिरर्कैः.
दद्भिर्न जिह्वा परिविष्टमाददाविर्निधौरकृणोदुस्रियाणाम्.. (६)
बृहस्पति ने जिस समय हिंसक बल असुर के आयुधों को सूर्य के समान तेजस्वी तथा
अग्नि के समान तृप्त करने वाले आयुधों द्वारा छिन्नभिन्न किया, उसी समय गायों पर
अधिकार कर लिया. जीभ जिस प्रकार दांतों द्वारा काटे हुए पदार्थ का भक्षण करती है, उसी
प्रकार बृहस्पति ने बल को मारकर गायों को प्राप्त किया. (६)
बृहस्पतिरमत हि त्यदासां नाम स्वरीणां सदने गुहा यत्.
आण्डैव भित्त्वा शकुनस्य गर्भमुदुस्रियाः पर्वतस्य त्मनाजत.. (७)
बृहस्पति ने गुफा में रंभाने वाली गायों का स्वर जिस समय जाना, उसी समय पर्वत को
भेदकर अकेले ही गाएं इस प्रकार बाहर निकालीं, जिस प्रकार पक्षी अंडे को फोड़कर बच्चा
बाहर निकालता है. (७)
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