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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1679 of 1855

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Page 1679

चुराई गई गायों का पाषाणमय द्वार खोला तथा रंभाती हुई गायों के बंधन ढीले किए.
बृहस्पति ने उच्च स्वर से स्तुति की तथा सब जानते हुए गान किया. (३)
अवो द्वाभ्यां पर एकया गा गुहा तिष्ठन्तीरनृतस्य सेतौ.
बृहस्पतिस्तमसि ज्योतिरिच्छन्नुदस्रा आकर्वि हि तिस्र आवः.. (४)
उस अंधकारपूर्ण गुफा में स्थित गायों को नीचे एक एवं ऊपर दो द्वारों की सहायता से
छिपाया गया था. बृहस्पति ने अंधकार में प्रकाश ले जाने की इच्छा करते हुए तीनों द्वारों को
खोला और गायों को बाहर निकाल दिया. (४)
विभिद्या पुरं शयथेमपाचीं निस्त्रीणि साकमुदधेरकृन्तत्.
बृहस्पतिरुषसं सूर्यं गामर्कं विवेद स्तनयन्निव द्यौः.. (५)
बृहस्पति रात भर सोते रहे. प्रातः उन्होंने गुहा का पिछला भाग तोड़ा तथा बादल के
समान राक्षस की उस गुफा के तीनों द्वार खोल दिए. बृहस्पति ने प्रातःकाल सूर्य एवं गायों को
एक साथ देखा. बृहस्पति उस समय मेघ के समान गर्जन कर रहे थे. (५)
इन्द्रो वलं रक्षितारं दुघानां करेणेव वि चकर्ता रवेण.
स्वेदाञ्जिभिराशिरमिच्छमानोऽरोदयत्पणिमा गा अमुष्णात्.. (६)
बृहस्पति ने दुधारू गायों की रक्षा करने वाले असुर को हुंकार से इस प्रकार नष्ट कर
दिया, जैसे अपने हाथ के आयुध से मारा हो. उन्होंने मरुतों के साथ संयोग की इच्छा करते
हुए पणियों को रुलाया और गायों को वापस ले आए. (६)
स ईं सत्येभिः सखिभिः शुचद्भिर्गोधायसं वि धनसैरदर्दः.
ब्रह्मणस्पतिर्वृषभिर्वराहर्घर्मस्वेदेभिर्द्रविणं व्यानट्.. (७)
बृहस्पति ने अपने तेजस्वी, सत्यवादी एवं धन देने वाले सहायकों से मिलकर गायों को
रोकने वाले राक्षस को विदीर्ण कर दिया. स्तोत्रों के स्वामी बृहस्पति ने जल बरसाने वाले, जल
का आहरण करने वाले एवं दीप्त आगमन वाले मरुतों के साथ गोधन को बाहर निकाला.
(७)
ते सत्येन मनसा गोपतिं गा इयानास इषणयन्त धीभिः.
बृहस्पतिर्मिथो अवद्यपेभिरुदुस्रिया असृजत स्वयुग्भिः.. (८)
मरुतों ने सच्चे मन से पणियों द्वारा अपहृत गायों को अपने कर्मों से प्राप्त करके
बृहस्पति को गायों का स्वामी बनाने की अभिलाषा की. बृहस्पति ने अपने सहयोगी मरुतों के
साथ गायों को गुफा से बाहर किया. (८)
तं वर्धयन्तो मतिभिः शिवाभिः सिंहमिव नानदतं सधस्थे.
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