ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextये कर्मणः क्रियमाणस्य मह्न ऋतेकर्ममुदजायन्त देवाः.. (७)
वज्रधारी इंद्र ने इन मरुतों के साथ वर्षा करने वाली शक्ति प्राप्त की एवं वृत्र की हत्या
करके वर्षा द्वारा धरती को सींचा. महान् इंद्र द्वारा किए गए वर्षा कार्य में मरुद्गण स्वयं ही
सहायक बनते हैं. (७)
युजा कर्माणि जनयन्विश्वौजा अशस्तिहा विश्वमनास्तुराषाट्.
पीत्वी सोमस्य दिव आ वृधानः शूरो निर्युधाधमद्दस्यून्.. (८)
सर्वत्र व्याप्त शक्ति वाले, राक्षसनाशक, अत्यंत मनस्वी एवं शत्रुओं पर शीघ्र विजय
प्राप्त करने वाले इंद्र मरुतों की सहायता से सभी कार्य करते हैं. इंद्र ने स्वर्ग से आकर
सोमपान किया और अपना शरीर बढ़ाया. शूर इंद्र ने आयुधों से शत्रुओं को मारा. (८)
सूक्त—५६ देवता—विश्वेदेव
इदं त एकं पर ऊ त एकं तृतीयेन ज्योतिषा सं विशस्व.
संवेशने तन्व१ श्चारुरेधि प्रियो देवानां परमे जनित्रे.. (१)
ऋषि अपने मरे हुए पुत्र वाजी से कहते हैं:—
तुम्हारा एक अंश अग्नि, दूसरा वायु और तीसरा तेजस्वी आत्मा है. इन तीनों अंशों से
अग्नि, वायु और आत्मा में अपने शरीर के प्रवेश के समय कल्याणकारी रूप में बढ़ो तथा
देवों के परम-जनक सूर्य के लोक में प्रिय बनो. (१)
तनूष्टे वाजिन्तन्वं१ नयन्ती वाममस्मभ्यं धातु शर्म तुभ्यम्.
अहुतो महो धरुणाय देवान्दिवीव ज्योतिः स्वमा मिमीयाः.. (२)
हे वाजी! तुम्हारे शरीर को अपने में मिलाती हुई यह धरती तुम्हारे और हमारे दोनों के
लिए कल्याण करे. तुम अपने स्थान से पतित न होकर ज्योति धारण करने के लिए देवों और
स्वर्ग में स्थित सूर्य के साथ अपनी आत्मा को मिला दो. (२)
वाज्यसि वाजिनेना सुवेनीः सुवितः स्तोमं सुवितो दिवं गाः.
सुवितो धर्म प्रथमानु सत्या सुवितो देवान्त्सुवितोऽनु पत्म.. (३)
हे पुत्र! तुम अन्नरस से शक्तिशाली एवं सुंदर हो. तुम अपने स्तोत्र की प्रेरणा से
स्तोत्रसंबंधी देव के समीप स्वर्ग में जाओ. तुम अपने द्वारा संपादित, प्रमुख एवं सच्चे फल
वाले धर्म का अनुगमन करो. तुम इंद्रादि देवों और सूर्य का अनुगमन करो. (३)
महिम्न एषां पितरश्चनेशिर देवा देवेष्वदधुरपि क्रतुम्.
समविव्यचुरुत यान्यत्विषुरैषां तनूषु नि विविशुः पुनः.. (४)
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